धर्म और संविधान आप कहते हैं कक हर्ारा देश का संविधान धर्म से बडा है , पर र् ैं कहता हूँ वक संविधान नह ं , धर्म बडा है। जब इकतहास क े पन्नों कन हम पलट कर देखते हैं , तब राज - कियम िह ों , धमम और आत्मसम्माि क े ककस्से रनते हैं। मुगलनों क े उस दौर में जब तलवारनों क धार बहुत तेज़ थ , तब कनई ककताब या आज क े सोंकवधाि क मेज ि थ । श श कटा कदया पर झुकाया िह ों उस व र कसख लाल िे , धमम क खाकतर प्र ाण कदए , उस क्र ू र मुग़ल काल िे। देश और धमम क रक्षा में , अपिा पूरा पररवार वार कदया , गनकवोंद कसोंह क े मासूमनों िे , हँसते - हँसते बकलदाि कदया । द वारनों में चुिवा कदया , उि छनटे - छनटे बच्नों कन , सात और िौ साल क े , उि स धे - सच्े बच्नों कन। अत्याचार सहे पुरखनों िे , माथे का कतलक और जिेऊ बचािे कन , तब कनई अदालत ि थ , उस बहते खूि कन रनकिे - थामिे कन। झाोंस क राि िे जब रणभूकम में हु ों कार भर , मातृभूकम क रक्षा क खाकतर , हाथनों में तलवार धर । गनरे शासकनों क े आगे ि झुककर , खुद क जाि लुटा द , कागज क े ककस कियम से िह ों , आत्मबल से िई सुबह ला द । भाई , बहि , पकत और पत्न — ये पावि अटूट बोंधि हैं , धमम और सोंस्क ृ कत से स ों चे , ररश्नों क े महकते चोंदि हैं। कागज़ क ककस धारा से ऊपर , इिक मयामदा भार है , सोंकवधाि से बहुत ऊ ँ च , यह जन्नों क साझ दार है। िमि मेरा इस देश क े पावि और ऊ ों चे सोंकवधाि कन , पर कनकट - कनकट िमि मेरा , मािव क े धमम और ईमाि कन। परवाह िह ों मुझे इसक , कक दुकिया का क्य ा कवचार है , मेरे कलए तन सोंकवधाि से बडा , आत्मा का यह धमम - सोंस्कार है। है धमम पास मेरे , तभ मैं इोंसाि क श्र े ण में आता हँ , कबि धमम क े तन क े वल पशु जैसा ह रह जाता हँ। कतलक , जिेऊ और मस्तक का चोंदि गवाह है , कहन्दू क े कलए उसका सिाति धमम ह साक्षात् ईश्वर क राह है। इस कलए मेरा कदल आज गवाह देता है , धमम से बडा कभ कनई संविधान नह ं हो सकता। Composed by : Gob ind a Thapa, M.A. B.Ed. NET (UGC) Vivekananda Kendra Vidyalaya (NEC) Baragolai