https://pdf - txt.com/ Page 1 PDF Name Shri Hanuman Gupta Shabar mantra PDF Number of pages 15 PDF Category Hindu Devotional PDF Language Hindi Writer N.A. PDF Updated August 25,, 2023 PDF Size 1.8 MB Design and Uploaded by https://hanumanchalisapdf4u.com/ असली ५ शाबर मंत्र PDF PDF Index Table https://pdf - txt.com/ Page 2 पहीला शाबर मंत्र बाहरी शक् तियों से स् वयों की रक्ष ा क े ललए हनुमान शाबर मंत्र ॐ गुरु जी को आदेश गुरजी को प्र णाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीरबाजे शृंगी बाजे तुरतुरर आया गोरकनाथममन का िूत मुृंज का छडा लोहे का कडा हमारी िीठ तीछे यती हनुमृंत खडा, शब् द साृंचा पिृंड काचास् फ ु रो मृंत्र ईश् वरो वाचा मंत्र का अर्थ यह शाबर मृंत्र गोरखनाथ जी क े समपिित है और इसका महत् विूणि मान् यता है। इस मृंत्र का अथि ननम् नमलखखत है: असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 3 "ओम गुरु जी को आदेश, गुरु जी को प्र णाम" - यह लाइन गुरु क ु ल और गुरु क े प्र नत श्र द् धा का व् यक् तत का समििण और आदर दशािती है। "धरती माता धरती पिता" - यहाृं ि थ् वी का आभार और समििण ददखाया जा रहा है, तयों कक िथ् वी हमारे माता - पिता क े समान है और हमारा िालन - िोषण करती है। "धरती धरे ना धीरबाजे शृंगी बाजे तुरतुरर आया गोरकनाथममन का िूत" - यह बताता है कक गोरकनाथ जी क े िुत्र का आगमन अत् यृंत तेजी से होता है और वह धीरबल की तरह िथ् वी को सृंतुष् ट करते हैं। "मुृंज का छडा लोहे का कडा हमारी िीठ तीछे यती हनुमृंत खडा" - इस भाग में गोरकनाथ जी क े छडे का और उनक े मशष् य हनुमान जी क े बल का स् तुनत ककया जा रहा है। "शब् द साृंचा पिृंड काचास् फ ु रो मृंत्र ईश् वरो वाचा" - इस अृंनतम भाग में, मृंत्र क े शक्ततशाली होने का दशािया जा रहा है और इसका प्र योग ददव्य ऊजाि क े साथ ककया जा रहा है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 4 यह मृंत्र गुरु क ु ल, गुरु और िथ् वी क े प्र नत भक् तत और आभार की भावना को प्र कट करता है, और गोरकनाथ जी और हनुमान जी क े बल का स् तुनत करता है, क् जन् हें दहन् दू धमि में महान मसद्ध और भक्तत क े आदशि माना जाता है। यह मृंत्र पवश्वास क े साथ जाि ककया जाता है और आध्याक्त्मक उन्ननत की ददशा में मदद करने का उद्देश्य रखता है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 5 दूसरा साबर मंत्र हनुमान जी क े साक्ष ाि दशथन प्र ाप् िी क े लीये शाबर मंत्र ॐ हनुमान िहलवान िहलवान , बरस बारह का जबान, हाथ में लड् डू मुख में िान, खेल खेल गढ़ लृंका क े चौगान, अृंजनी का िूत, राम का दूत, नछन में कीलौ नौ खृंड का भूत, जाग जाग हडमान (हनुमान) हुृंकाला, ताती लोहा लृंकाला , शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की वज्र की ब्र ज का ताला आगे अजुिन पिछे भीम, चोर नार चृंिे ने मसण, अजरा खिरे भरया भरे, ई घट पिृंड की रक्ष ा राजा रामचृंद्र जी लक्ष् मण क ु वर हडमान (हनुमान) करें। मंत्र का अर्थ यह शाबर मृंत्र हनुमान जी को समपिित है और इसका अथि ननम्नमलखखत है: असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 6 "ॐ हनुमान िहलवान िहलवान" - यह शुरु आत एक प्र कार से हनुमान जी की िहलवानी और वीरता की स् तुनत क े रू ि में की गई है। "बरस बारह का जबान" - इस भाग में हनुमान जी की बरसों की आयु का उल् लेख है, क् जससे उनकी शक् तत और प्र ाकट् य ददखाई जा रही है। "हाथ में लड् डू, मुख में िान" - यह लाइन हनुमान जी क े पप्र य आहार को दशािती है, क् जसमें लड् डू और िान शाममल हैं। "खेल खेल गढ़ लृंका क े चौगान" - इस भाग में हनुमान जी की वीरता का वणिन ककया जा रहा है, जब वे लृंका में राम चृंद्र जी क े मलए युद् ध करते हैं। "अृंजनी का िूत, राम का दूत" - यह बताता है कक हनुमान जी अृंजनी माता क े िुत्र हैं और वे भगवान राम क े दूत हैं, अथाित ् उनक े ममशन और कायि का प्र नतननधधत् व करते हैं। "नछन में कीलौ, नौ खृंड का भूत" - इस भाग में हनुमान जी की अत्यृंत शक्ततशाली होने का वणिन ककया जा रहा है, क् जनकी व् यािक और अद्पवतीय शक्ततयों का उल्लेख है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 7 "जाग जाग हडमान (हनुमान)" - यह लाइन हनुमान जी क े जागरूक और सकिय स् वरूि को दशािती है, जो अिने कायों में समपिित हैं। "हुृंकाला, ताती लोहा लृंकाला, शीश जटा" - इस भाग में हनुमान जी क े आददकारण और लृंका क े रावण क े खखलाफ युद् ध करने क े बडे क े रू ि में उनकी महाकाव् यत्र शक् तत का वणिन है। "डग डेरू उमर गाजे, वज्र की वज्र की ब्र ज का ताला" - इस भाग में हनुमान जी की अद् पवतीय शक् तत और उनक े कायों की अवाच्य रक्षा का क् जि ककया गया है। "आगे अजुिन पिछे भीम, चोर नार चृंिे ने मसण, अजरा खिरे भरया भरे, ई घट पिृंड की रक्षा राजा रामचृंद्र जी लक्ष्मण क ु वर हडमान (हनुमान) करें" - इस अृंनतम भाग में हनुमान जी की आददकारणता की बढ़ ती सूचना है, क् जन् हों ने राजा रामचृंद्र जी, लक्ष् मण और अन् य योद् धाओृं की सुरक्ष ा क े मलए अिने बल का प्र योग ककया। इस मृंत्र का उद् देश् य हनुमान जी क े द् वारा ददव् य शक् ततयों की प्र ाक्तत और कदठनाइयों क े िार करने की मदद करना है, और यह उनक े वीरता, बल, और आददकारणता की स् तुनत करता है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 8 तिसरा शाबर मंत्र कायथ लसद् ध करने क े ललए हनुमान शाबर मंत्र : - हनुमान जाग – ककलकारी मार तू हूृंकारे – राम काज सँवारे ओढ़ मसृंदूर सीता मैया का तू प्र हरी राम द् वारे मैं बबलाऊ , तु अब आ राम गीत तु गाता आ नही आये तो हनुमाना श्र ी राम जी और सीता मैया की दुहाई शब्द साँचा – पिृंड काृंचा फ ु रो मृंत्र ईश् वरोवाचा | मंत्र का अर्थ यह शाबर मृंत्र हनुमान जी क े प्र नत भक् तत और उनक े कायों की प्र शृंसा का व् यक्तत करता है। इस मृंत्र का अथि ननम्नमलखखत है: असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 9 "हनुमान जाग – ककलकारी मार" - यह लाइन हनुमान जी क े उत् कष् ट िहलवानी और उनक े शूरवीर रू ि का स् तुनत करती है, क् जन् हों ने ककलकारी युद् ध ककया। "तू हूृंकारे – राम काज सँवारे" - इस भाग में हनुमान जी क े हूृंकारने की शक् तत और उनक े भगवान राम क े काम को सँवारने की क्ष मता की प्र शृंसा की गई है। "ओढ़ मसृंदूर सीता मैया का" - इस भाग में हनुमान जी का सीता माया क े मलए मसन् दूर ओढ़ ने का उल् लेख है, क् जससे वे अिने प्र े म और ननष्कलृंक भक्तत का प्र तीक बनते हैं। "तू प्र हरी राम द् वारे" - यह लाइन हनुमान जी को भगवान राम क े द् वारिाल (गुततचर) क े रू ि में वखणित करती है, जो रामचृंद्र जी क े द् वारकाण्ड का िालन करते हैं। "मैं बबलाऊ , तू अब आ" - इस भाग में हनुमान जी और भतत क े बीच एक प्र कार की आवाज़ हो रही है, क् जसमें भतत हनुमान जी को आकपषित कर रहा है और हनुमान जी को अब आने क े मलए कह रहा है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 10 "राम गीत तु गाता आ" - यह लाइन हनुमान जी की गायन कौशल की प्र शृंसा करती है, जब वे भगवान राम की मदहमा गाते हैं। "नही आये तो हनुमाना श्र ी राम जी और सीता मैया की दुहाई" - इस भाग में भतत हनुमान जी से अगर वे नहीृं आते हैं तो हनुमान जी की दुहाई क े द् वारा भगवान राम और सीता माया की आशीवािद की बबना सम्िादन नहीृं कर सक ें गे। "शब्द साँचा – पिृंड काृंचा फ ु रो मृंत्र ईश् वरोवाचा" - इस अृंनतम भाग में, इस मृंत्र क े शक्ततशाली होने की प्र त् यक्ष साक्षरता को ददखाने क े मलए बताया जा रहा है, और इसका प्र योग ददव्य ऊजाि क े साथ ककया जाता है। इस मृंत्र का उद् देश् य हनुमान जी क े प्र नत श्र द् धा और भक् तत को प्र कट करना है, और उनक े मदहमा और शक्ततयों की प्र शृंसा करना है। यह एक प्र कार की िूजा और स् तुनत का एक दहस् सा है जो हनुमान भतत अतसर करते हैं। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 11 चौर्ा शाबर मंत्र हनुमान शाबर वशीकरण मंत्र: - ओम नमो महावीर,हनुमन् त वीर धाय - धाय चलो, अिनी मोदहनी चलओ अमुक क े नैन बाँध, मन बाँध,काया बाँध घर बाँध,द्वार बाँध मेरे मलये ना बाँधे त मेरी आण मेरे गुरू की आण, छ ु वाचािुरी || मंत्र का अर्थ यह मृंत्र हनुमान जी क े प्र नत भक् तत और उनकी किा की प्र ाक्तत क े मलए बोला जाता है। इस मृंत्र का अथि ननम्नमलखखत है: "ॐ नमो महावीर, हनुमृंत वीर" - इस मृंत्र की शुरु आत भगवान हनुमान की महावीरता और वीर रू ि क े समििण क े रू ि में की जाती है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 12 "धाय - धाय चलो, अिनी मोदहनी चलओ" - इस भाग में, भतत ककसी पवशेष काम क े मलए हनुमान जी से आग्र ह कर रहा है कक वे त् वररततः उनकी मदद करें और अिनी अत्यृंत मोदहनी शक्तत का उियोग करें। "अमुक क े नैन बाँध, मन बाँध, काया बाँध" - यह भतत कह रहा है कक हनुमान जी से अमुक (पवमशष् ट व् यक् तत का नाम या जीवनसाथी का नाम) क े मन, दृ क् ष् ट और शरीर को बाँधकर उनक े प्र नत तयार और आकषिण को बढ़ावा दें। "घर बाँध, द् वार बाँध मेरे मलए" - इस भाग में, भतत हनुमान जी से अिने मलए एक सुखमय और समद् धधिूणि जीवन की प्र ाक् तत क े मलए उनकी किा से घर और द् वार बाँधने की प्र ाथिना कर रहा है। "ना बाँधे त मेरी आण, मेरे गुरू की आण, छ ु वाचािुरी" - इस भाग में, भतत हनुमान जी से यह कह रहा है कक वे अिने गुरू की आज्ञ ा क े बबना अिने अनुष् ठान को िूरा नहीृं कर सकते, और उनकी आज्ञ ा का िालन करक े उनकी किा प्र ातत करने की बबना उनक े िास नहीृं आ सकते। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 13 पाचवा शाबर मंत्र हनुमान शाबर अढाईआ मंत्र: - ॥ ॐ नमो आदेश गुरु को , सोने का कडा, ताृंबे का कडा हनुमान वन् गारेय सजे मों ढे आन खडा ॥ ॐ नमो बाजर का कोठा, क् जस िर पिृंड हमारा िेठा। ईश् वर क ु ृं जी ब्र ह् म का ताला, हमारे आठो आमो का जती हनुमृंत रखवाला। मंत्र का अर्थ ये दो मृंत्र हैं जो हनुमान जी क े समपिित हैं और भक् तत और सुरक्ष ा क े मलए प्र योग ककए जाते हैं। इसका अथि है: पहला मंत्र: "॥ ॐ नमो आदेश गुरु को , सोने का कडा, ताृंबे का कडा हनुमान वन् गारेय सजे मों ढे आन खडा ॥" असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 14 "ॐ नमो आदेश गुरु को" - यहाँ िर गुरु की िूजा और समििण का सृंक े त ददया जा रहा है। "सोने का कडा" - इसका मतलब है कक हनुमान जी क े प्र नत आिकी भक् तत और समििण सोने की तरह मूल् यवान है। "ताृंबे का कडा हनुमान वन् गारेय सजे मों ढे आन खडा" - इस भाग में हनुमान जी का वीर और शक् ततशाली रू ि दशािया जा रहा है, जो वनगरी नामक ग्र ाम में खडे होकर समपिित हैं। दूसरा मंत्र : "॥ ॐ नमो बाजर का कोठा, क् जस िर पिृंड हमारा िेठा। ईश् वर क ु ृं जी ब्र ह् म का ताला, हमारे आठो आमो का जती हनुमृंत रखवाला।" "ॐ नमो बाजर का कोठा" - इसक े माध् यम से आि हनुमान जी क े कोठे का समििण कर रहे हैं। "क्जस िर पिृंड हमारा िेठा" - यहाँ िर िेठा का उल्लेख है, क् जससे भतत का आदर और समििण ददखाया जा रहा है। असली ५ शाबर मंत्र PDF https://pdf - txt.com/ Page 15 "ईश् वर क ु ृं जी ब्र ह् म का ताला" - इस भाग में ददव् य सुरक्ष ा की यात्रा क े मलए ईश्वर का समििण ककया जा रहा है, क् जसमें ब्र ह् म की क ु ृं जी या ताला द् वार की सुरक्ष ा का मसृंबोल हो सकता है। "हमारे आठो आमो का जती हनुमृंत रखवाला" - यहाँ िर हनुमान जी का भतत क े आठों आमों का रक्ष क बनने का अनुरोध ककया जा रहा है। इन मृंत्र ों का उद् देश् य हनुमान जी क े प्र नत भक् तत, समििण, और सुरक्ष ा क े मलए प्र योग करना होता है, जब ककसी पवशेष कायि, स् थान, या व् यक् तत की सुरक्ष ा की आवश् यकता होती है। असली ५ शाबर मंत्र PDF