सं० २०७४ दो सौ सǺानबेवाँ पुनमुμďण ३०,००० क ु ल मुďण ७४,०९,००० Ēकाशक गीताĒेस, गोरखपुर—२७३००५ (गोȵबÊदभवन-कायाμलय, कोलकाता का सं×थान) फोन : (०५५१) २३३४७२१, २३३१२५०; फ ै ·स : (०५५१) २३३६९९७ Web : gitapress org e - mail : booksales@gitapress org गीताĒेस Ēकाशन gitapressbookshop in से online खरीदƺ। ।। Ĝीहȯरः । । Ĝीरामचȳरतमानसका ×थान Ɂहɢदɣ-साȵहÆयमƺ ही नहƱ, जगत्क े साȵहÆयमƺ ȵनराला है। इसक े जोड़का ऐसा ही सवाμǨसुÊदर, उǺम काȉक े ल³णdžसे युǧ, साȵहÆयक े सभी रसdžका आ×वादन करानेवाला, काȉकलाकɥ ƥȵȐसे भी सवLJ¼च कोȴटका तथा आदशμ गाहμ×Çय-जीवन, आदशμ राजधमμ, आदशμ पाȳरवाȳरक जीवन, आदशμ पाȵतěतधमμ, आदशμ ĕातृधमμक े साथ-साथ सवLJ¼च भȷǧ, ́ान, Æयाग, वैरा¹य तथा सदाचारकɥ ȷश³ा देनेवाला, ×čी-पुơष, बालक-वृȁ और युवा—सबक े ȷलये समान उपयोगी एवं सवLJपȳर सगुण-साकार भगवान्कɥ आदशμ मानवलीला तथा उनक े गुण, Ēभाव, रह×य तथा Ēेमक े गहन तǻवको अÆयÊत सरल, रोचक एवं ओज×वी शÍदdžमƺ ȉǧ करनेवाला कोई Ƥसरा ĀÊथ Ɂहɢदɣ-भाषामƺ ही नहƱ, कदाȶचत् संसारकɥ ȵकसी भाषामƺ आजतक नहƱ ȷलखा गया। यही कारण है ȵक ȹजतने चावसे गरीब-अमीर, ȷशȸ³त-अȷशȸ³त, गृह×थ-संÊयासी, ×čी-पुơष, बालक-वृȁ—सभी Ĝेणीक े लोग इस ĀÊथरÆनको पढ़ते हƽ, उतने चावसे और ȵकसी ĀÊथको नहƱ पढ़ते तथा भȷǧ, ́ान, नीȵत, सदाचारका ȹजतना Ēचार जनतामƺ इस ĀÊथसे Ɠआ है, उतना कदाȶचत् और ȵकसी ĀÊथसे नहƱ Ɠआ। ȹजस ĀÊथका जगत्मƺ इतना मान हो, उसक े अनेकdž सं×करणdžका छपना तथा उसपर अनेकdž टɣकाǗका ȷलखा जाना ×वाभाȵवक ही है। इस ȵनयमक े अनुसार Ĝीरामचȳरतमानसक े भी आजतक सैकड़dž सं×करण छप चुक े हƽ। इसपर सैकड़dž ही टɣकाएँ ȷलखी जा चुकɥ हƽ। हमारे गीता-पु×तकालयमƺ रामायण-सÏबÊधी सैकड़dž ĀÊथ ȸभȇ-ȸभȇ भाषाǗक े आ चुक े हƽ। अबतक अनुमानतः इसकɥ लाखdž Ēȵतयाँ छप चुकɥ हdžगी। आये ȴदन इसका एक-न-एक नया सं×करण देखनेको ȶमलता है और उसमƺ अÊय सं×करणdžकɥ अपे³ा कोई-न-कोई ȵवशेषता अवÕय रहती है। इसक े पाठक े सÏबÊधमƺ भी रामायणी ȵवȀानdžमƺ बƓत मतभेद है, यहाँतक ȵक कई ×थलdžमƺ तो ĒÆयेक चौपाईमƺ एक-न-एक पाठभेद ȸभȇ-ȸभȇ सं×करणdžमƺ ȶमलता है। ȹजतने पाठभेद इस ĀÊथक े ȶमलते हƽ, उतने कदाȶचत् और ȵकसी Ēाचीन ĀÊथक े नहƱ ȶमलते। इससे भी इसकɥ सवLJपȳर लोकȵĒयता ȷसȁ होती है। इसक े अȵतȳरǧ रामचȳरतमानस एक आशीवाμदाÆमक ĀÊथ है। इसक े ĒÆयेक पȅको Ĝȁालु लोग मÊčवत् आदर देते हƽ और इसक े पाठसे लौȵकक एवं पारमाɏथɢक अनेक कायμ ȷसȁ करते हƽ। यही नहƱ, इसका Ĝȁापूवμक पाठ करने तथा इसमƺ आये Ɠए उपदेशdžका ȵवचारपूवμक मनन करने एवं उनक े अनुसार आचरण करनेसे तथा इसमƺ वɐणɢत भगवान्कɥ मधुर लीलाǗका ȶचÊतन एवं कɥतμन करनेसे मो³Ƣप परम पुơषाथμ एवं उससे भी बढ़कर भगवÆĒेमकɥ ĒाȻËत आसानीसे कɥ जा सकती है। ·यdž न हो, ȹजस ĀÊथकɥ रचना गो×वामी तुलसीदासजी-जैसे अनÊय भगवद्भǧक े Ȁारा, ȹजÊहdžने भगवान् Ĝीसीतारामजीकɥ क ृ पासे उनकɥ ȴदȉ लीलाǗका ĒÆय³ अनुभव करक े यथाथμ Ƣपमƺ वणμन ȵकया है, सा³ात् भगवान् Ĝीगौरीशंकरजीकɥ आ ́ासे Ɠई तथा ȹजसपर उÊहƱ भगवान्ने ‘सÆयं ȷशवं सुÊदरम्’ ȷलखकर अपने हाथसे सही कɥ, उसका इस Ēकारका अलौȵकक Ēभाव कोई आȊयμकɥ बात नहƱ है। ऐसी दशामƺ इस अलौȵकक ĀÊथका ȹजतना भी Ēचार ȵकया जायगा, ȹजतना अȶधक पठन-पाठन एवं मनन-अनुशीलन होगा, उतना ही जगत्का मǨल होगा—इसमƺ तȵनक भी संदेह नहƱ है। वतμमान समयमƺ तो, जब सवμč हाहाकार मचा Ɠआ है, सारा संसार ƣःख एवं अशाȻÊतकɥ भीषण ¾वालासे जल रहा है, जगत्क े कोने-कोनेमƺ मार-काट मची Ɠई है और Ēȵतȴदन हजारdž मनुÖयdžका संहार हो रहा है, करोड़dž-अरबdžकɥ सÏपȷǺ एक- Ƥसरेक े ȵवनाशक े ȷलये खचμ कɥ जा रही है, ȵव ́ानकɥ सारी शȷǧ पृÇवीको Õमशानक े Ƣपमƺ पȳरणत करनेमƺ लगी Ɠई है, संसारक े बड़े-से-बड़े मȽ×तÖक संहारक े नये-नये साधनdžको ढूँढ़ ȵनकालनेमƺ ȉ×त हƽ, जगत्मƺ सुख-शाȻÊत एवं Ēेमका Ēसार करने तथा भगवÆक ृ पाका जीवनमƺ अनुभव करनेक े ȷलये रामचȳरतमानसका पाठ एवं अनुशीलन परम आवÕयक है। इसी ƥȵȐसे गीताकɥ भाँȵत मानसक े भी कई छोटे-बड़े यथासाÉय शुȁ, Ēामाȸणक, स×ते, सȶचč एवं सटɣक सं×करण ȵनकालनेका आयोजन गीताĒेसक े Ȁारा ȵकया जा रहा है। इस सं×करणमƺ दोहे-चौपाइयdžका अथμ वही है, जो ‘मानसाङ्क’मƺ था। पाठ एवं अथμकɥ भूलdžक े ȷलये हम अपने ȵव ́ पाठक महानुभावdžसे ³मा-Ēाथμना करते हƽ और भगवान्कɥ व×तु ȵवनĖभावसे भगवान्कɥ सेवामƺ अपμण करते हƽ। ȱवनीत— Ēकाशक ȱवषय १- नवाȑपारायणक े ȱवĜाम-×थान २- मासपारायणक े ȱवĜाम-×थान ३- पारायण-ȱवȲध बालकाÅड ४- मंगलाचरण ५- गुƝ-वÊदना ६- ĔाȒण-संत-वÊदना ७- खल-वÊदना ८- संत-असंत-वÊदना ९- रामƞपसे जीवमाčकɡ वÊदना १०- तुलसीदासजीकɡ दɟनता और रामभȳǣमयी कȱवताकɡ मȱहमा ११- कȱव-वÊदना १२- वाÒमीȱक, वेद, ĔȒा, देवता, ȳशव, पावμती आȰदकɡ वÊदना १३- Ĝीसीताराम-धाम-पȯरकर-वÊदना १४- Ĝीनाम-वÊदना और नाम-मȱहमा १५- Ĝीरामगुण और Ĝीरामचȯरतकɡ मȱहमा १६- मानसȱनमाμणकɡ ȱतȳथ १७- मानसका ƞप और माहाÆÏय १८- या ́वÒ·य-भरǼाज-संवाद तथा Ēयाग-माहाÆÏय १९- सतीका ĕम, Ĝीरामजीका ऐȈयμ और सतीका खेद २०- ȳशवजीǼारा सतीका Æयाग, ȳशवजीकɡ समाȲध २१- सतीका द³-य ́मƶ जाना २२- पȱतक े अपमानसे Ɵःखी होकर सतीका योगाȷ¹नसे जल जाना, द³-य ́-ȱवÉवंस २३- पावμतीका जÊम और तप×या २४- Ĝीरामजीका ȳशवजीसे ȱववाहक े ȳलये अनुरोध २५- सËतɉषɞयǂकɡ परी³ामƶ पावμतीजीका महǷव २६- कामदेवका देवकायμक े ȳलये जाना और भ×म होना २७- रȱतको वरदान २८- देवताǓका ȳशवजीसे Íयाहक े ȳलये Ēाथμना करना, सËतɉषɞयǂका पावμतीक े पास जाना २९- ȳशवजीकɡ ȱवȲचč बारात और ȱववाहकɡ तैयारी ३०- ȳशवजीका ȱववाह ३१- ȳशव-पावμती-संवाद ३२- अवतारक े हेतु ३३- नारदका अȴभमान और मायाका Ēभाव ३४- ȱवȈमोȱहनीका ×वयंवर, ȳशवगणǂको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग ३५- मनु-शतƞपा-तप एवं वरदान ३६- Ēतापभानुकɡ कथा ३७- रावणाȰदका जÊम, तप×या और उनका ऐȈयμ तथा अÆयाचार ३८- पृÇवी और देवताȰदकɡ कƝण पुकार ३९- भगवान्का वरदान ४०- राजा दशरथका पुčेȱȌ य ́, राȱनयǂका गभμवती होना ४१- Ĝीभगवान्का Ēाकǭ और बाललीलाका आनÊद ४२- ȱवȈाȲमčका राजा दशरथसे राम-लÛमणको माँगना ४३- ȱवȈाȲमč-य ́कɡ र³ा ४४- अहÒया-उǽार ४५- Ĝीराम-लÛमणसȱहत ȱवȈाȲमčका जनकपुरमƶ Ēवेश ४६- Ĝीराम-लÛमणको देखकर जनकजीकɡ Ēेम-मु¹धता ४७- Ĝीराम-लÛमणका जनकपुर–ȱनरी³ण ४८- पुÖपवाȰटका-ȱनरी³ण, सीताजीका Ēथम दशμन, Ĝीसीतारामजीका पर×पर दशμन ४९- Ĝीसीताजीका पावμती-पूजन एवं वरदानĒाȷËत तथा राम-लÛमण-संवाद ५०- Ĝीराम-लÛमणसȱहत ȱवȈाȲमčका य ́शालामƶ Ēवेश ५१- Ĝीसीताजीका य ́शालामƶ Ēवेश ५२- बÊदɟजनǂǼारा जनकĒȱत ́ाकɡ घोषणा ५३- राजाǓसे धनुष न उठना, जनककɡ ȱनराशाजनक वाणी ५४- ĜीलÛमणजीका þोध ५५- धनुषभंग ५६- जयमाल पहनाना ५७- Ĝीराम-लÛमण और परशुराम-संवाद ५८- दशरथजीक े पास जनकजीका Ơत भेजना, अयोÉयासे बारातका Ē×थान ५९- बारातका जनकपुरमƶ आना और ×वागताȰद ६०- Ĝीसीता-राम-ȱववाह ६१- बारातका अयोÉया लौटना और अयोÉयामƶ आनÊद ६२- Ĝीरामचȯरत सुनने-गानेकɡ मȱहमा अयोÉयाकाÅड ६३- मंगलाचरण ६४- रामरा¾याȴभषेककɡ तैयारी, देवताǓकɡ ȅाक ु लता तथा सर×वतीजीसे उनकɡ Ēाथμना ६५- सर×वतीका मÊथराकɡ बुȵǽ फ े रना, क ै क े यी-मÊथरा-संवाद ६६- क ै क े यीका कोपभवनमƶ जाना ६७- दशरथ-क ै क े यी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमÊčका महलमƶ जाना और वहाँसे लौटकर Ĝीरामजीको महलमƶ भेजना ६८- Ĝीराम-क ै क े यी-संवाद ६९- Ĝीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वाȳसयǂका ȱवषाद, क ै क े यीको समझाना ७०- Ĝीराम-कौसÒया-संवाद ७१- Ĝीसीता-राम-संवाद ७२- Ĝीराम-कौसÒया-सीता-संवाद ७३- Ĝीराम-लÛमण-संवाद ७४- ĜीलÛमण-सुȲमčा-संवाद ७५- Ĝीरामजी, लÛमणजी, सीताजीका महाराज दशरथक े पास ȱवदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना ७६- Ĝीराम-सीता-लÛमणका वनगमन और नगर-ȱनवाȳसयǂको सोये छोड़कर आगे बढ़ना ७७- Ĝीरामका शृǤवेरपुर पƓँचना, ȱनषादक े Ǽारा सेवा ७८- लÛमण-ȱनषाद-संवाद, Ĝीराम-सीतासे सुमÊčका संवाद, सुमÊčका लौटना ७९- क े वटका Ēेम और गǤा-पार जाना ८०- Ēयाग पƓंचना, Ĝीराम-भरǼाज-संवाद, यमुनातीरȱनवाȳसयǂका Ēेम ८१- तापस-Ēकरण ८२- यमुनाको Ēणाम, वनवाȳसयǂका Ēेम ८३- Ĝीराम-वाÒमीȱक-संवाद ८४- Ȳचčक ू टमƶ ȱनवास, कोल-भीलǂक े Ǽारा सेवा ८५- सुमÊčका अयोÉयाको लौटना और सवμč शोक देखना ८६- दशरथ-सुमÊč-संवाद, दशरथ-मरण ८७- मुȱन वȳसȎका भरतजीको बुलानेक े ȳलये Ơत भेजना ८८- Ĝीभरत-शčुºनका आगमन और शोक ८९- भरत-कौसÒया-संवाद और दशरथजीकɡ अÊÆयेȱȌ ȱþया ९०- वȳसȎ-भरत-संवाद, Ĝीरामजीको लानेक े ȳलये Ȳचčक ू ट जानेकɡ तैयारी ९१- अयोÉयावाȳसयǂसȱहत Ĝीभरत-शčुºन आȰदका वनगमन ९२- ȱनषादकɡ शङ्का और सावधानी ९३- भरत-ȱनषाद-Ȳमलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवाȳसयǂका Ēेम ९४- भरतजीका Ēयाग जाना और भरत-भरǼाज-संवाद ९५- भरǼाजǼारा भरतका सÆकार ९६- इÊď-बृह×पȱत-संवाद ९७- भरतजी Ȳचčक ू टक े मागμमƶ ९८- Ĝीसीताजीका ×वȄ, Ĝीरामजीको कोल-ȱकरातǂǼारा भरतजीक े आगमनकɡ सूचना, रामजीका शोक, लÛमणजीका þोध ९९- Ĝीरामजीका लÛमणजीको समझाना एवं भरतजीकɡ मȱहमा कहना १००- भरतजीका मÊदाȱकनी-×नान, Ȳचčक ू टमƶ पƓँचना, भरताȰद सबका पर×पर Ȳमलाप, ȱपताका शोक और Ĝाǽ १०१- वनवाȳसयǂǼारा भरतजीकɡ मÅडलीका सÆकार, क ै क े यीका पȆाǶाप १०२-ĜीवȳसȎजीका भाषण १०३-Ĝीराम-भरताȰदका संवाद १०४-जनकजीका पƓँचना, क े ला-ȱकराताȰदकɡ भƶट, सबका पर×पर Ȳमलाप १०५- कौसÒया-सुनयना-संवाद, Ĝीसीताजीका शील १०६-जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकɡ मȱहमा १०७-जनक-वȳसȎाȰद-संवाद, इÊďकɡ ȲचÊता, सर×वतीका इÊďको समझाना १०८-Ĝीराम-भरत-संवाद १०९-भरतजीका तीथμ-जल-×थापन तथा Ȳचčक ू टĕमण ११०-Ĝीराम-भरत-संवाद, पाƟका-Ēदान, भरतजीकɡ ȱवदाई १११-भरतजीका अयोÉया लौटना, भरतजीǼारा पाƟकाकɡ ×थापना, नȵÊदĀाममƶ ȱनवास और Ĝीभरतजीक े चȯरč-Ĝवणकɡ मȱहमा अरÅयकाÅड ११२-मंगलाचरण ११३-जयÊतकɡ क ु Ȱटलता और फलĒाȷËत ११४-अȱč-Ȳमलन एवं ×तुȱत ११५-Ĝीसीता-अनसूया-Ȳमलन और Ĝीसीताजीको अनसूयाजीका पाȱतěतधमμ कहना ११६-Ĝीरामजीका आगे Ē×थान, ȱवराध-वध और शरभǤ-ĒसǤ ११७-रा³स-वधकɡ Ēȱत ́ा करना ११८-सुतीÛणजीका Ēेम, अगׯय-Ȳमलन, अगׯय-संवाद, रामका दÅडक-वन-Ēवेश और जटायु-Ȳमलन ११९-पÀचवटɟ-ȱनवास और Ĝीराम-लÛमण-संवाद १२०-शूपμणखाकɡ कथा, शूपμणखाका खर-Ơषणक े पास जाना और खर-ƠषणाȰदका वध १२१-शूपμणखाका रावणक े ȱनकट जाना, Ĝीसीताजीका अȷ¹न-Ēवेश और माया-सीता १२२- मारीचĒसंग और ×वणμ-मृगƞपमƶ मारीचका मारा जाना १२३-Ĝीसीताहरण और Ĝीसीता-ȱवलाप १२४-जटायु-रावण-युǽ १२५-Ĝीरामजीका ȱवलाप, जटायुका Ēसंग १२६-कबÊध-उǽार १२७-शबरीपर क ृ पा, नवधा भȳǣ-उपदेश और पÏपासरकɡ ओर Ē×थान १२८-नारद-राम-संवाद १२९-संतǂक े ल³ण और सÆसंग-भजनक े ȳलये Ēेरणा ȱकȷÖकÊधाकाÅड १३०-मंगलाचरण १३१-Ĝीरामजीसे हनुमान्जीका Ȳमलना और Ĝीराम-सुĀीवकɡ Ȳमčता १३२-सुĀीवका Ɵःख सुनाना, बाȳलवधकɡ Ēȱत ́ा, Ĝीरामजीका Ȳमč-ल³ण-वणμन १३३-सुĀीवका वैरा¹य १३४-बाȳल-सुĀीव-युǽ, बाȳल-उǽार १३५-ताराका ȱवलाप, ताराको Ĝीरामजी-Ǽारा उपदेश और सुĀीवका रा¾याȴभषेक तथा अंगदको युवराजपद १३६-वषाμ-ऋतु-वणμन १३७-शरद्-ऋतु-वणμन १३८-Ĝीरामकɡ सुĀीवपर नाराजी, लÛमणजीका कोप १३९-सुĀीव-राम-संवाद और सीताजीकɡ खोजक े ȳलये बंदरǂका Ē×थान १४०-गुफामƶ तपȹ×वनीक े दशμन १४१-वानरǂका समुďतटपर आना, सÏपातीसे भƶट और बातचीत १४२-समुď लाँघनेका परामशμ, जाÏबवÊतका हनुमान्जीको बल याद Ȱदलाकर उÆसाȱहत करना १४३-Ĝीरामगुणका माहाÆÏय सुÊदरकाÅड १४४-मंगलाचरण १४५-हनुमान्जीका लङ्काको Ē×थान, सुरसासे भƶट, छाया पकड़नेवाली रा³सीका वध १४६-लङ्कावणμन, लȲङ्कनीपर Ēहार, लङ्कामƶ Ēवेश १४७-हनुमान्-ȱवभीषण-संवाद १४८-हनुमान्जीका अशोकवाȰटकामƶ सीताको देखकर Ɵःखी होना और रावणका सीताजीको भय Ȱदखलाना १४९-Ĝीसीता-ȱčजटा-संवाद १५०-Ĝीसीता-हनुमान्-संवाद १५१-हनुमान्जीǼारा अशोकवाȰटका-ȱवÉवंस, अ³यक ु मार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमƶ बाँधकर सभामƶ ले जाना १५२-हनुमान्-रावण-संवाद १५३-लङ्का-दहन १५४-लङ्का जलानेक े बाद हनुमान्जीका सीताजीसे ȱवदा माँगना और चूड़ामȴण पाना १५५-समुďक े इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-Ēवेश, सुĀीव-Ȳमलन, Ĝीराम- हनुमान्-संवाद १५६-Ĝीरामजीका वानरǂकɡ सेनाक े साथ चलकर समुďतटपर पƓँचना १५७-मÊदोदरी-रावण-संवाद १५८-रावणको ȱवभीषणका समझाना और ȱवभीषणका अपमान १५९-ȱवभीषणका भगवान् Ĝीरामजीकɡ शरणक े ȳलये Ē×थान और शरणĒाȷËत १६०-समुď पार करनेक े ȳलये ȱवचार, रावणƠत शुकका आना और लÛमणजीक े पčको लेकर लौटना १६१-Ơतका रावणको समझाना और लÛमणजीका पč देना १६२-समुďपर Ĝीरामजीका þोध और समुďकɡ ȱवनती १६३-Ĝीराम-गुणगानकɡ मȱहमा लङ्काकाÅड १६४-मंगलाचरण १६५-नल-नीलǼारा पुल बाँधना, ĜीरामजीǼारा ĜीरामेȈरकɡ ×थापना १६६-Ĝीरामजीका सेनासȱहत समुď पार उतरना, सुबेल पवμतपर ȱनवास, रावणकɡ ȅाक ु लता १६७-रावणको मÊदोदरीका समझाना, रावण-Ēह×त-संवाद १६८-सुबेलपर Ĝीरामजीकɡ झाँकɡ और चÊďोदयवणμन १६९-Ĝीरामजीक े बाणसे रावणक े मुक ु ट-छčाȰदका ȱगरना १७०-मÊदोदरीका ȱफर रावणको समझाना और Ĝीरामकɡ मȱहमा कहना १७१-अंगदजीका लंका जाना और रावणकɡ सभामƶ अंगद-रावण-संवाद १७२-रावणको पुनः मÊदोदरीका समझाना १७३-अंगद-राम-संवाद १७४-युǽारÏभ १७५-माÒयवान्का रावणको समझाना १७६-लÛमण-मेघनाद-युǽ, लÛमणजीको शȳǣ लगना १७७-हनुमान्जीका सुषेण वैȁको लाना एवं संजीवनीक े ȳलये जाना, कालनेȲम-रावण- संवाद, मकरी-उǽार, कालनेȲम-उǽार १७८-भरतजीक े बाणसे हनुमान्का मूȮ¼छμत होना, भरत-हनुमान्-संवाद १७९-Ĝीरामजीकɡ Ēलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लÛमणजीका उठ बैठना १८०-रावणका क ु Ïभकणμको जगाना, क ु Ïभकणμका रावणको उपदेश और ȱवभीषण- क ु Ïभकणμ-संवाद १८१-क ु Ïभकणμ-युǽ और उसकɡ परमगȱत १८२-मेघनादका युǽ, रामजीका लीलासे नागपाशमƶ बँधना १८३-मेघनाद-य ́-ȱवÉवंस, युǽ और मेघनाद-उǽार १८४-रावणका युǽक े ȳलये Ē×थान और Ĝीरामजीका ȱवजय-रथ तथा वानर-रा³सǂका युǽ १८५-लÛमण-रावण-युǽ १८६-रावण-मू¼छाμ, रावण-य ́-ȱवÉवंस, राम-रावण-युǽ १८७-इÊďका Ĝीरामजीक े ȳलये रथ भेजना, राम-रावण-युǽ १८८-रावणका ȱवभीषणपर शȳǣ छोड़ना, रामजीका शȳǣको अपने ऊपर लेना, ȱवभीषण-रावण-युǽ १८९-रावण-हनुमान्-युǽ, रावणका माया रचना, रामजीǼारा माया-नाश १९०-घोर युǽ, रावणकɡ मू¼छाμ १९१-ȱčजटा-सीता-संवाद १९२-राम-रावण-युǽ, रावण-वध, सवμč जयÉवȱन १९३-मÊदोदरी-ȱवलाप, रावणकɡ अÊÆयेȱȌ-ȱþया १९४-ȱवभीषणका रा¾याȴभषेक १९५-हनुमान्जीका सीताजीको क ु शल सुनाना, सीताजीका आगमन और अȷ¹न-परी³ा १९६-देवताǓकɡ ×तुȱत, इÊďकɡ अमृत-वषाμ १९७-ȱवभीषणकɡ Ēाथμना, Ĝीरामजीक े Ǽारा भरतजीक े Ēेमदशाका वणμन, शीā अयोÉया पƓँचनेका अनुरोध १९८-ȱवभीषणका व×čाभूषण बरसाना और वानर-भालुǓका उÊहƶ पहनना १९९-पुÖपकȱवमानपर चढ़कर Ĝीसीता-रामजीका अवधक े ȳलये Ē×थान २००-Ĝीरामचȯरतकɡ मȱहमा उǶरकाÅड २०१-मंगलाचरण २०२-भरत-ȱवरह तथा भरत-हनुमान्-Ȳमलन, अयोÉयामƶ आनÊद २०३-Ĝीरामजीका ×वागत, भरत-Ȳमलाप, सबका ȲमलनानÊद २०४-राम-रा¾याȴभषेक, वेद×तुȱत, ȳशव×तुȱत २०५-वानरǂकɡ और ȱनषादकɡ ȱवदाई २०६-रामरा¾यका वणμन २०७-पुčोÆपȳǶ, अयोÉयाजीकɡ रमणीयता, सनकाȰदका आगमन और संवाद २०८-हनुमान्जीक े Ǽारा भरतजीका Ēȋ और Ĝीरामजीका उपदेश २०९- Ĝीरामजीका Ēजाको उपदेश (Ĝीरामगीता), पुरवाȳसयǂकɡ क ृ त ́ता २१०-Ĝीराम-वȳसȎ-संवाद, Ĝीरामजीका भाइयǂसȱहत अमराईमƶ जाना २११-नारदजीका आना और ×तुȱत करक े ĔȒलोकको लौट जाना २१२-ȳशव-पावμती-संवाद, गƝड़-मोह, गƝड़जीका काकभुशुȮÅडसे रामकथा और राम- मȱहमा सुनना २१३-काकभुशुȮÅडका अपनी पूवμजÊमकथा और कȳलमȱहमा कहना २१४-गुƝजीका अपमान एवं ȳशवजीक े शापकɡ बात सुनना २१५-ƝďाȌक २१६-गुƝजीका ȳशवजीसे अपराध-³मापन, शापानुĀह और काकभुशुȮÅडकɡ आगेकɡ कथा २१७-काकभुशुȮÅडजीका लोमशजीक े पास जाना और शाप तथा अनुĀह पाना २१८- ́ान-भȳǣ-ȱनƞपण, ́ानदɟपक और भȳǣकɡ महान् मȱहमा २१९-गƝड़जीक े सात Ēȋ तथा काकभुशुȮÅडक े उǶर २२०-भजन-मȱहमा २२१-रामायण-माहाÆÏय, तुलसी-ȱवनय और फल×तुȱत २२२-रामायणजीकɡ आरती २२३-गो×वामी तुलसीदासजीकɡ संȴ³Ëत जीवनी २२४-Ĝीरामशलाका Ēȋावली पहला ȱवĜाम Ơसरा ȱवĜाम तीसरा ȱवĜाम चौथा ȱवĜाम पाँचवाँ ȱवĜाम छठा ȱवĜाम सातवाँ ȱवĜाम आठवाँ ȱवĜाम नवाँ ȱवĜाम पहला ȱवĜाम Ơसरा ȱवĜाम तीसरा ȱवĜाम चौथा ȱवĜाम पाँचवाँ ȱवĜाम छठा ȱवĜाम सातवाँ ȱवĜाम आठवाँ ȱवĜाम नवाँ ȱवĜाम दसवाँ ȱवĜाम ¹यारहवाँ ȱवĜाम बारहवाँ ȱवĜाम तेरहवाँ ȱवĜाम चौदहवाँ ȱवĜाम पंďहवाँ ȱवĜाम सोलहवाँ ȱवĜाम सčहवाँ ȱवĜाम अठारहवाँ ȱवĜाम उȃीसवाँ ȱवĜाम बीसवाँ ȱवĜाम इ·कɡसवाँ ȱवĜाम बाईसवाँ ȱवĜाम तेईसवाँ ȱवĜाम चौबीसवाँ ȱवĜाम पचीसवाँ ȱवĜाम छÍबीसवाँ ȱवĜाम सǶाईसवाँ ȱवĜाम अǫाईसवाँ ȱवĜाम उनतीसवाँ ȱवĜाम तीसवाँ ȱवĜाम ।। Ĝीहȯरः । । पारायण-ȱवȲध Ĝीरामचȯरतमानसका ȱवȲधपूवμक पाठ करनेवाले महानुभावǂको पाठारÏभक े पूवμ Ĝीतुलसीदासजी, ĜीवाÒमीȱकजी, Ĝीȳशवजी तथा Ĝीहनुमान्जीका आवाहन, पूजन करनेक े पȆात् तीनǂ भाइयǂसȱहत Ĝीसीतारामजीका आवाहन, षोडशोपचार पूजन और Éयान करना चाȱहये। तदनÊतर पाठका आरÏभ करना चाȱहये। सबक े आवाहन, पूजन और Éयानक े मÊč þमशः नीचे ȳलखे जाते हƹ— अथ आवाहनमÊčः तुलसीक नम×तुÎयȲमहाग¼छ शुȲचěत । नैऋ μ Æय उपȱवÕयेदं पूजनं Ēȱतगृȓताम् । । १ । । ॐ तुलसीदासाय नमः । ĜीवाÒमीक नम×तुÎयȲमहाग¼छ शुभĒद । उǶरपूवμयोमμÉये ȱतȎ गृȐɟÖव मेऽचμनम् । । २ । । ॐ वाÒमीकाय नमः । गौरीपते नम×तुÎयȲमहाग¼छ महेȈर । पूवμदȴ³णयोमμÉये ȱतȎ पूजां गृहाण मे । । ३ । । ॐ गौरीपतये नमः । ĜीलÛमण नम×तुÎयȲमहाग¼छ सहȱĒयः । याÏयभागे समाȱतȎ पूजनं संगृहाण मे । । ४ । । ॐ ĜीसपÆनीकाय लÛमणाय नमः । Ĝीशčुºन नम×तुÎयȲमहाग¼छ सहȱĒयः । पीठ×य पȴȆमे भागे पूजनं ×वीक ु ƝÖव मे । । ५ । । ॐ ĜीसपÆनीकाय शčुºनाय नमः । Ĝीभरत नम×तुÎयȲमहाग¼छ सहȱĒयः । पीठक×योǶरे भागे ȱतȎ पूजां गृहाण मे । । ६ । । ॐ ĜीसपÆनीकाय भरताय नमः । Ĝीहनुमȃम×तुÎयȲमहाग¼छ क ृ पाȱनधे । पूवμभागे समाȱतȎ पूजनं ×वीक ु Ɲ Ēभो । । ७ । । ॐ हनुमते नमः । अथ Ēधानपूजा च कतμȅा ȱवȲधपूवμकम् । पुÖपाǨȿलɞ गृहीÆवा तु Éयानं क ु याμÆपर×य च । । ८ । । रǣाÏभोजदलाȴभरामनयनं पीताÏबरालङ्क ृ तं ÕयामाǤं ȱǼभुजं Ēसȃवदनं Ĝीसीतया शोȴभतम् । काƝÅयामृतसागरं ȱĒयगणैĕाμčाȰदȴभभाμȱवतं वÊदे ȱवÖणुȳशवाȰदसेȅमȱनशं भǣ े ȌȳसȵǽĒदम् । । ९ । । आग¼छ जानकɡनाथ जान·या सह राघव । गृहाण मम पूजां च वायुपुčाȰदȴभयुμतः । । १० । । इÆयावाहनम् सुवणμरȲचतं राम Ȱदȅा×तरणशोȴभतम् । आसनं ȱह मया दǶं गृहाण मȴणȲचȱčतम् । । ११ । । इȱत षोडशोपचारैः पूजयेत् ॐ अ×य ĜीमÊमानसरामायणĜीरामचȳरत×य ĜीȷशवकाकभुशुȲÅडया ́वÒ·यगो×वाȶमतुलसीदासा ऋषयः Ĝीसीतारामो देवता Ĝीरामनाम बीजं भवरोगहरी भȷǧः शȷǧः मम ȵनयȼÊčताशेषȵवºनतया ĜीसीतारामĒीȵतपूवμकसकलमनोरथȷसȁयथǏ पाठे ȵवȵनयोगः । ĜीसीतारामाÎयां नमः । ĜीरामचÊďाय नमः । Ĝीरामभďाय नमः । इȱत मÊčȱčतयेन आचमनं क ु याμत् । ĜीयुगलबीजमÊčेण Ēाणायामं क ु याμत् । । जग मंगल गुनĀाम राम क े । दाȱन मुक ु ȱत धन धरम धाम क े । । अǤʣȎाÎयां नमः । राम राम कȱह जे जमुहाहƭ । ȱतÊहȱह न पाप पुंज समुहाहƭ । । तजμनीÎयां नमः । राम सकल नामÊह तƶ अȲधका । होउ नाथ अघ खग गन बाȲधका । । मÉयमाÎयां नमः । उमा दाƝ जोȱषत का नाǍ । सबȱह नचावत रामु गोसाǍ । । अनाȲमकाÎयां नमः । सनमुख होइ जीव मोȱह जबहƭ । जÊम कोȰट अघ नासȽहɞ तबहƭ । । कȱनȲȎकाÎयां नमः । मामȴभर³य रघुक ु ल नायक । धृत बर चाप ƝȲचर कर सायक । । करतलकरपृȎाÎयां नमः । इȱत करÊयासः जग मंगल गुनĀाम राम क े । दाȱन मुक ु ȱत धन धरम धाम क े । । ƕदयाय नमः । राम राम कȱह जे जमुहाहƭ । ȱतÊहȱह न पाप पुंज समुहाहƭ । । ȳशरसे ×वाहा । राम सकल नामÊह तƶ अȲधका । होउ नाथ अघ खग गन बȲधका । । ȳशखायै वषट् । उमा दाƝ जोȱषत कɡ नाǍ । सबȱह नचावत रामु गोसाǍ । । कवचाय Ɠम् । सनमुख होइ जीव मोȱह जबहƭ । जÊम कोȰट अघ नासȽहɞ तबहƭ । । नेčाÎयां वौषट् । मामȴभर³य रघुक ु ल नायक । धृत बर चाप ƝȲचर कर सायक । । अ×čाय फट् । इȱत ƕदयाȰदÊयासः मामवलोकय पंकज लोचन । क ृ पा ȱबलोकȱन सोच ȱबमोचन । । नील तामरस ×याम काम अȯर । ƕदय क ं ज मकरंद मधुप हȯर । । जातुधान बƞथ बल भंजन । मुȱन स¾जन रंजन अघ गंजन । । भूसुर सȳस नव बृंद बलाहक । असरन सरन दɟन जन गाहक । । भुज बल ȱबपुल भार मȱह खंȲडत । खर Ơषन ȱबराध बध पंȲडत । । रावनाȯर सुखƞप भूपबर । जय दसरथ क ु ल क ु मुद सुधाकर । । सुजस पुरान ȱबȰदत ȱनगमागम । गावत सुर मुȱन संत समागम । । काƝनीक Íयलीक मद खंडन । सब ȱबȲध क ु सल कोसला मंडन । । कȳल मल मथन नाम ममताहन । तुलȳसदास Ēभु पाȱह Ēनत जन । । इȱत Éयानम्