तुलसीदास द्वारा रचित यह हनुमान चालीसा हम सभी को हिन्दी मे तो याद ही है पर आज आप इसका मूल स्वरूप संस्कृत मे लिखी हनुमान चालीसा भी पढ़ सकेंगे।