Signaler un abus

Détails PDF

Coordonnées

Public

दर्पण भीतर का: सभ्यता, संस्कृति, उपभोक्तावाद और भारत का भविष्य

Rupesh Ranjan

दर्पण भीतर का: सभ्यता, संस्कृति, उपभोक्तावाद और भारत का भविष्य केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज के समक्ष उपस्थित सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक प्रश्नों पर एक गहन चिंतन है। यह पुस्तक पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है कि तीव्र वैश्वीकरण, डिजिटल क्रांति, उपभोक्तावाद और बदलती जीवनशैली के दौर में भारत अपनी सभ्यतागत पहचान, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय आदर्शों को किस प्रकार सुरक्षित रखते हुए भविष्य की ओर अग्रसर हो सकता है।

Prévisualiser un document PDF