रागी ( नाचनी ) क े फायदे और खाने का सही तरीका रागी यानी नाचनी एक पौि टक अनाज है , िजसे जोड़ों और हड् डयों की सेहत को ध् यान में रखते हुए संतु लत डाइट में शा मल कया जा सकता है। इसे रोटी , द लया , खचड़ी या रागी की कांजी क े रू प में खा सकते हैं। 1. रागी खाने क े 5 प्र मुख फायदे 1. हड् डयों क े लए क ै िल् शयम रागी क ै िल् शयम का अच् छा स्र ोत है , जो हड् डयों और दाँतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। 2. फाइबर से भरपूर साबुत रागी और उसका आटा पाचन तथा नय मत मल त् याग में मदद कर सकते हैं। 3. वजन प्र बंधन में सहायक फाइबर युक् त रागी पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकती है। वजन पर असर क ु ल क ै लोरी और पूरी डाइट पर भी नभ र करता है। 4. ऊजा और पोषण रागी काब हाइड्र े ट , क ु छ प्र ोटीन और कई ख नज प्र दान करती है। 5. ग् लूटेन - फ्र ी अनाज प्र ाकृ तक रू प से रागी में ग् लूटेन नहीं होता। सी लएक रोग में इसे प्र मा णत ग् लूटेन - फ्र ी उत् पाद क े रू प में लेना चा हए ता क क्र ॉस - क ं टै मनेशन से बचा जा सक े । जोड़ों क े दद क े लए जरू री बात : रागी क ै िल् शयम स हत पोषक तत् व देती है , ले कन इसे खाने से ग ठया , घुटनों का दद या जोड़ों की सूजन सीधे ठीक होती है , ऐसा प्र मा णत नहीं है। 2. रागी की 3 आसान रे सपी रे सपी 1: रागी का द लया नाश् ते क े लए सामग्र ी ● रागी का आटा — 2 बड़े चम् मच ● पानी — 1 कप ● दूध — वैकिल् पक ● इलायची — वैकिल् पक व ध : रागी क े आटे को थोड़े ठंडे पानी में घोलें। फर गम पानी में डालकर लगातार चलाते हुए 5–8 मनट पकाएँ , जब तक अच् छी तरह पककर गाढ़ा न हो जाए। चाहें तो दूध मलाएँ। क ै से लें : नाश् ते में एक छोटी कटोरी से शुरु आत करें। बना ज् यादा चीनी या गुड़ क े लेना बेहतर है। रे सपी 2: रागी की रोटी दोपहर या रात क े भोजन क े लए सामग्र ी ● रागी का आटा — ½ कप ● गम पानी — आवश् यकतानुसार ● थोड़ा नमक व ध : आटे में थोड़ा - थोड़ा गम पानी डालकर नरम आटा गूँथें। हाथ से थपथपाकर रोटी बनाएँ और गम तवे पर दोनों तरफ अच् छी तरह सेंक ें । क ै से लें : सब् जी , दाल या दही क े साथ लें। जरू रत क े अनुसार रोटी की मात्र ा तय करें। रे सपी 3: नमकीन रागी कांजी हल् क े भोजन क े लए सामग्र ी ● रागी का आटा — 2 बड़े चम् मच ● पानी — 1½ कप ● जीरा — ¼ छोटा चम् मच ● थोड़ा नमक ● बारीक कटी सिब् जयाँ — वैकिल् पक व ध : रागी को ठंडे पानी में घोलें। गम पानी में जीरा डालकर घोल मलाएँ और लगातार चलाते हुए 5–8 मनट पकाएँ। चाहें तो सिब् जयाँ डालकर उनक े नरम होने तक पकाएँ। क ै से लें : दोपहर क े भोजन या हल् क े नाश् ते में लें। 3. रागी को डाइट में क ै से शा मल करें ? समय खाने का तरीका सुबह रागी का द लया दोपहर रागी की रोटी + दाल + सब् जी शाम कम मीठा रागी द लया रात रागी की रोटी और हल् की सब् जी , य द अनुक ू ल हो व् यावहा रक सुझाव : शुरु आत में दन में एक बार रागी को गेहूँ या चावल क े कसी एक हस् से क े वकल् प क े रू प में लें। इसे खाने क े साथ दाल , दही , पनीर , अंडे या अन् य प्र ोटीन स्र ोत भी रखें। रागी को हर भोजन में शा मल करना जरू री नहीं है। 4. जोड़ों और हड् डयों की सेहत क े लए वशेष बातें ● रागी में प्र त 100 ग्र ाम लगभग 344 mg क ै िल् शयम बताया गया है ; वास् त वक मात्र ा कस् म और प्र ोसे संग क े अनुसार बदल सकती है। ● क ै िल् शयम क े साथ पया प् त प्र ोटीन , वटा मन D और नय मत , उपयुक् त शारी रक ग त व ध भी हड् डयों क े लए महत् वपूण हैं। ● डाय बटीज में रागी खाने से रक् त शक रा नहीं बढ़ेगी , इसकी गारंटी नहीं है। मात्र ा और पूरी रे सपी मायने रखती है। ● कडनी की बीमारी या डॉक् टर द् वारा दी गई वशेष डाइट में रागी की मात्र ा पहले डॉक् टर या डाइटी शयन से तय करें।