यह शोधपरक अध्ययन स्वामी विवेकानंद और सुकरात के दार्शनिक, नैतिक एवं वैचारिक दृष्टिकोणों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में तर्क, अध्यात्म, शिक्षा, नैतिकता, आत्मज्ञान तथा मानव विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों के माध्यम से पूर्वी और पश्चिमी दर्शन के बीच समानताओं और भिन्नताओं को समझने का प्रयास किया गया है। यह शोध विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए एक उपयोगी एवं प्रेरणादायक अध्ययन सामग्री प्रदान करता है।