Created with Photo-to-PDF One Click Converter. Download here: https://firehawk.ai/phototopdf https://firehawk.ai/phototopdf/ अध्याय – 1 शुक्र ग्र ह का सामान्य परिच य शुक्र ( Venus) सौरमंडल का दू सरा ग्र ह है और सूयय से औसतन लगभग 10.82 करोड़ ककलोमीटर की दू री पर स्थ ित है। आकार , द्र व्य मान तथा घनत्व में पृथ्वी से अत्यधिक समानता होने के कारण इसे " पृथ्वी का जुड़वााँ ग्र ह " (Earth's Twin) कहा जाता है। यद्यकप दोनों ग्र हों में कई समानताएाँ हैं , किर भी शुक्र की सतह और वायुमंडल की पररस्थिकतयााँ पृथ्वी से पूरी तरह भभन्न हैं। शुक्र का व्य ास लगभग 12,104 ककलोमीटर तथा द्र व्य मान पृथ्वी के द्र व्य मान का लगभग 81.5% है। यह एक िलीय ( Terrestrial) ग्र ह है , जजसकी सतह मुख्य रू प से चट्टानों और िातुओं से बनी है। शुक्र का वायुमंडल अत्यंत घना है और इसका लगभग 96.5% भाग काबयन डाइऑक्साइड से बना है। इसके ऊपर सल्फ्यूररक अम्ल के बादल पाए जाते हैं। घने वायुमंडल के कारण यहााँ अत्यधिक ग्र ीनहाउस प्र भाव उत्पन्न होता है , जजससे सतह का औसत तापमान लगभग 465° C रहता है। यही कारण है कक शुक्र सौरमंडल का सबसे गमय ग्र ह है। शुक्र अपनी िुरी पर अधिकांश ग्र हों के कवपरीत ददशा में घूमता है। इस कवशेष प्र कार के घूणयन को प्र कतगामी घूणयन (Retrograde Rotation) कहते हैं। यहााँ एक ददन , उसके एक वषय से भी अधिक लंबा होता है। राकि आकाश में शुक्र सूयय और चंद्रमा के बाद सबसे अधिक चमकीला प्र ाकृकतक पपिंड है। यह कभी सूयोदय से पहले भोर के तारे और कभी सूयायस्त के बाद सााँझ के तारे के रू प में ददखाई देता है , जबकक वास्तव में यह एक ग्र ह है। शुक्र का कोई प्र ाक ृ कतक उपग्रह या वलय नहीं है। सोकवयत संघ के वेनेरा अभभयानों तथा नासा के मैगलन धमशन सकहत अनेक अंतररक्ष अभभयानों ने इस ग्र ह का कवस्तृत अध्ययन ककया है। इन अभभयानों से प्र ाप्त जानकारी ने शुक्र की संरचना , वायुमंडल और भूगभीय कवशेषताओं को समझने में महत्वपूणय योगदान ददया है। शुक्र का अध्ययन क े वल एक ग्र ह के रू प में ही नहीं , बल्ल्फक पृथ्वी के भकवष्य , ग्र ीनहाउस प्र भाव , जलवायु पररवतयन तथा पृथ्वी जैसे ग्र हों के कवकास को समझने के ललए भी अत्यंत महत्वपूणय है। अध्याय 2 सौर मंडल में स्थ ान एवं उत्पत्ति शुक्र ( Venus ) सौर मंडल का दू सरा ग्र ह है। यह सूयय से औसतन 10.82 करोड़ ककलोमीटर (108.2 ममललयन ककमी) की दू री पर पररक्रमा करता है। सूयय से ग्र हों का क्र म इस प्र कार है — बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पकत, शकन, अरुण और वरुण। इस प्र कार शुक्र, बुध और पृथ्वी के बीच स्थ स्थ त है। शुक्र एक आंतररक ( Inner Planet ) तथा स्थ लीय ( Terrestrial Planet ) ग्र ह है। इसकी संरचना मुख्य रू प से लसललक े ट चट्टानों तथा धातुओं से बनी है। आकार और द्र व्य मान में पृथ्वी से अत्यमधक समानता होने के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वााँ ग्र ह ( Earth ’ s Twin ) भी कहा जाता है। वैज्ञाकनकों क े अनुसार शुक्र की उत्पत्ति लगभग 4.56 अरब वर्य पूवय सौर मंडल के कनमायण के समय हु ई थी। उस समय गैस और धूल क े एक कवशाल बादल, जजसे सौर नीहाररका ( Solar Nebula ) कहा जाता है, के गुरुत्वीय संक ु चन से सूयय का कनमायण हु आ। सूयय क े चारों ओर बची हु ई गैस, धूल और चट्टानी कणों से एक घूणयनशील चक्र ( Protoplanetary Disk ) बना। इसी चक्र में छोटे - छोटे कण आपस में टकराकर बड़े पपिंडों में पररवर्तिंत हु ए। लाखों वर्ों तक यह प्र कक्रया चलती रही और अंततः शुक्र सकहत अन्य ग्र हों का कनमायण हु आ। चूाँकक शुक्र सूयय क े अपेक्षाक ृ त कनकट बना, इसललए यहााँ हल्के तत्वों और बर् य जैसे पदाथय अमधक मात्रा में नहीं टटक सक े । पररणामस्वरूप यह एक चट्टानी ग्र ह क े रू प में कवकलसत हु आ। बाद में इसकी आंतररक ऊष्मा, ज् वालामुखीय गकतकवमधयों तथा वायुमंडलीय कवकास ने इसे वतयमान स् वरूप प्र दान ककया। आज शुक्र सौर मंडल क े सबसे अमधक अध्ययन ककए जाने वाले ग्र हों में से एक है, क् योंकक इसकी उत्पत्ति और कवकास का अध्ययन पृथ्वी जैसे ग्र हों क े कनमायण तथा उनके दीघयकाललक कवकास को समझने में महत्वपूणय भूममका कनभाता है। अध्याय 3 आकार, द्र व्य मान एवं आंतररक संरचना शुक्र ( Venus ) आकार और द्र व्य मान की दृ मि से पृथ्वी के सबसे कनकट का ग्र ह है। इसी कारण इसे प्र ायः “पृथ्वी का जुड़वााँ ग्र ह ( Earth ’ s Twin ) ” कहा जाता है। यद्यकप दोनों ग्र हों में अनेक भौकतक समानताएाँ हैं, कर्र भी उनकी सतह, वायुमंडल तथा जलवायु में अत्यमधक अंतर पाया जाता है। 3.1 आकार ( Size ) शुक्र का औसत व्य ास 12,104 ककलोमीटर है, जो पृथ्वी के व्य ास (12,742 ककमी) का लगभग 95% है। इसका औसत कत्रज्या 6,051.8 ककलोमीटर है। शुक्र लगभग पूणयतः गोलाकार ग्र ह है, क् योंकक इसका घूणयन बहुत धीमा है और ध्र ु वों पर चपटीकरण ( Flattening ) अत्यंत कम है। 3.2 द्र व्य मान ( Mass ) शुक्र का द्र व्य मान लगभग 4.867 × 10 ²⁴ ककलोग्राम है, जो पृथ्वी के द्र व्य मान का लगभग 81.5% है। इसके कारण इसका गुरुत्वाकर्यण भी पृथ्वी क े बहुत कनकट है। शुक्र पर गुरुत्वीय त् वरण लगभग 8.87 मीटर प्र कत सेकंड ² है, जबकक पृथ्वी पर यह 9.81 मीटर प्र कत सेक ं ड ² है। इसललए यटद पृथ्वी पर ककसी व्य स्थ क् त का भार 100 ककलोग्राम है, तो शुक्र पर उसका भार लगभग 90 ककलोग्राम होगा। 3.3 घनत्व ( Density ) शुक्र का औसत घनत्व लगभग 5.24 ग्र ाम प्र कत घन सेंटीमीटर है। यह पृथ्वी (5.51 ग्र ाम/घन सेमी) से थोड़ा कम है, जजससे स्प ि होता है कक शुक्र भी मुख्यतः चट्टानों और धातुओं से कनर्मिंत एक स्थ लीय ग्र ह है। 3.4 आंतररक संरचना ( Internal Structure ) वैज्ञाकनकों क े अनुसार शुक्र की आंतररक संरचना पृथ्वी के समान तीन मुख्य भागों में कवभाजजत है — (1) भूपपयटी ( Crust ): यह शुक्र की सबसे बाहरी ठोस परत है। इसकी मोटाई का अनुमान लगभग 20 से 50 ककलोमीटर लगाया गया है। यह मुख्य रू प से बेसाल्ट जैसी आग्नेय चट्टानों से बनी है। (2) मैंटल ( Mantle ): भूपपयटी क े नीचे लगभग 3,000 ककलोमीटर मोटा मैंटल स्थ स्थ त है। यह गमय लसललकेट चट्टानों से बना है। माना जाता है कक शुक्र पर अतीत और संभवतः वतयमान में भी ज् वालामुखीय गकतकवमधयााँ इसी परत से संबंमधत हैं। (3) क्र ोड ( Core ): शुक्र क े क ें द्र में लौह ( Iron ) और कनक े ल ( Nickel ) से बना क्र ोड स्थ स्थ त है, जजसका व्य ास लगभग 6,000 – 7,000 ककलोमीटर माना जाता है। वैज्ञाकनकों का अनुमान है कक इसका बाहरी भाग द्र व अवस्था में तथा भीतरी भाग ठोस अवस्था में हो सकता है, हालांकक इस कवर्य पर अभी भी शोध जारी है। 3.5 पृथ्वी से तुलना आकार, द्र व्य मान और संरचना में समानता क े बावजूद शुक्र और पृथ्वी का कवकास अलग - अलग टदशा में हु आ। पृथ्वी पर जीवन क े अनुक ू ल वातावरण कवकलसत हु आ, जबकक शुक्र पर अत्यमधक ग्र ीनहाउस प्र भाव के कारण तापमान इतना बढ़ गया कक वह सौर मंडल का सबसे गमय ग्र ह बन गया। इस प्र कार आकार और आंतररक संरचना की दृ मि से शुक्र पृथ्वी का कनकटतम समकक्ष है, पकिंतु उसकी सतही पररस्थस्थकतयााँ उसे एक अत्यंत कवर्म और रहस्यमय ग्र ह बनाती हैं। अध्याय 4 वायुमंडलीय संरचना, रासायकनक संघटन एवं ऊपरी कनवासयोग्य क्ष े त्र ( Habitable Zone ) शुक्र ग्र ह का वायुमंडल सौर मंडल क े सभी स्थ लीय ग्र हों में सबसे अमधक घना और जटटल है। इसकी मोटाई लगभग 250 ककलोमीटर तक र्ै ली हु ई है तथा सतह पर वायुदाब पृथ्वी के समुद्र तल के वायुदाब का लगभग 92 गुना है। यही घना वायुमंडल शुक्र को सौर मंडल का सबसे गमय ग्र ह बनाता है। 4.1 वायुमंडलीय संरचना शुक्र का वायुमंडल कई परतों में कवभाजजत है। सबसे नीचे घना कनचला वायुमंडल है, जहााँ तापमान और दाब अत्यमधक होते हैं। इसक े ऊपर मध्य वायुमंडल तथा लगभग 45 से 70 ककलोमीटर की ऊ ाँ चाई पर सल््यूररक अम्ल ( H₂SO₄ ) क े घने बादलों की परतें स्थ स्थ त हैं। सबसे ऊपर कवरल ऊपरी वायुमंडल और बकहमंडल ( Exosphere ) है, जहााँ गैसों का घनत्व बहुत कम हो जाता है। 4.2 रासायकनक संघटन शुक्र क े वायुमंडल का प्र मुख घटक काबयन डाइऑक्साइड है। - काबयन डाइऑक्साइड ( CO₂ ) – लगभग 96.5% - नाइट्रोजन ( N₂ ) – लगभग 3.5% - अल्प मात्रा में सल्र्र डाइऑक्साइड ( SO₂ ), जलवाष्प ( H₂O ), काबयन मोनोऑक्साइड ( CO ), आगयन ( Ar ), हीललयम ( He ), कनयॉन ( Ne ) तथा अन्य गैसें उपस्थस्थत हैं। सल्र्र डाइऑक्साइड और जलवाष्प की अत्तभकक्रया से सल््यूररक अम्ल की सूक्ष्म बूंदें बनती हैं, जजनसे शुक्र के प्र लसद्ध अम्लीय बादल कनर्मिंत होते हैं। 4.3 ग्र ीनहाउस प्र भाव काबयन डाइऑक्साइड की अत्यमधक मात्रा क े कारण शुक्र पर अत्यंत शस्थक्तशाली ग्र ीनहाउस प्र भाव ( Runaway Greenhouse Effect ) उत्पन्न हु आ है। सूयय का प्र काश वायुमंडल से होकर सतह तक पहुाँच जाता है, लेककन सतह से कनकलने वाली ऊष्मा अंतररक्ष में वापस नहीं जा पाती। पररणामस्वरूप सतह का औसत तापमान लगभग 465 ° C बना रहता है। 4.4 ऊपरी कनवासयोग्य क्ष े त्र ( Upper Habitable Zone ) यद्यकप शुक्र की सतह जीवन क े ललए अत्यंत प्र कतक ू ल है, कर्र भी वैज्ञाकनकों का मानना है कक इसकी सतह से लगभग 50 से 60 ककलोमीटर की ऊ ाँ चाई पर स्थ स्थ त वायुमंडलीय क्ष े त्र अपेक्षाकृत अनुकूल हो सकता है। इस ऊ ाँ चाई पर — - तापमान लगभग 20 ° C से 60 ° C क े बीच हो सकता है। - वायुदाब पृथ्वी क े समुद्र तल क े वायुदाब क े लगभग बराबर होता है। - गुरुत्वाकर्यण पृथ्वी क े लगभग 90% क े समान अनुभव होता है। इन्हीं कारणों से इस क्ष े त्र को शुक्र का संभाकवत कनवासयोग्य क्ष े त्र ( Potential Habitable Zone ) कहा जाता है। हालांकक यहााँ सल््यूररक अम्ल क े बादल, जल की अत्यमधक कमी तथा तीव्र रासायकनक पररस्थस्थकतयााँ जीवन के ललए बड़ी चुनौकतयााँ प्र स् तुत करती हैं। अब तक इस क्ष े त्र में जीवन का कोई प्र त् यक्ष प्र माण नहीं ममला है। 4.5 वैज्ञाकनक महत्व शुक्र क े वायुमंडल का अध्ययन ग्र ीनहाउस प्र भाव, ग्र हों के जलवायु कवकास तथा पृथ्वी जैसे ग्र हों के भकवष्य को समझने में अत्यंत महत्वपूणय है। भकवष्य क े कई अंतररक्ष ममशन कवशेर् रू प से शुक्र के ऊपरी वायुमंडल और संभाकवत कनवासयोग्य क्ष े त्र का कवस्तृत अध्ययन करने की योजना बना रहे हैं। इस प्र कार शुक्र का वायुमंडल न क े वल सौर मंडल का सबसे घना वायुमंडल है, बल्ल्क ग्र ह कवज्ञान और खगोलजीवकवज्ञान ( Astrobiology ) क े अध्ययन का भी एक महत्वपूणय कवर्य है। अध्याय 5 ग्र ीनहाउस प्र भाव एवं उच्च तापमान शुक्र ग्र ह सौर मंडल का सबसे अमधक गमय ग्र ह है। यद्यकप बुध सूयय के अमधक कनकट स्थ स्थ त है, कर्र भी शुक्र का औसत सतही तापमान लगभग 465 ° C है। इसका मुख्य कारण शुक्र पर पाया जाने वाला अत्यंत शस्थक्तशाली ग्र ीनहाउस प्र भाव ( Runaway Greenhouse Effect ) है। 5.1 ग्र ीनहाउस प्र भाव क् या है? ग्र ीनहाउस प्र भाव वह प्र कक्रया है जजसमें ककसी ग्र ह का वायुमंडल सूयय से आने वाली ऊजाय को भीतर आने देता है, लेककन ग्र ह की सतह से कनकलने वाली अवरक्त (इन्रारेड) ऊष्मा का एक बड़ा भाग अंतररक्ष में वापस नहीं जाने देता। पररणामस्वरूप ऊष्मा वायुमंडल में र्ाँ स जाती है और ग्र ह का तापमान लगातार बढ़ता रहता है। पृथ्वी पर भी प्र ाक ृ कतक ग्र ीनहाउस प्र भाव पाया जाता है, जो जीवन के ललए आवश्यक है। पकिंतु शुक्र पर यह प्र भाव अत्यमधक तीव्र होकर अकनयंकत्रत ग्र ीनहाउस प्र भाव ( Runaway Greenhouse Effect ) में बदल गया है। 5.2 शुक्र पर ग्र ीनहाउस प्र भाव क े कारण शुक्र पर अत्यमधक तापमान क े प्र मुख कारण कनम्नललखखत हैं — 1. वायुमंडल में लगभग 96.5% काबयन डाइऑक्साइड ( CO₂ ) की उपस्थस्थकत। 2. वायुमंडल का अत्यमधक घना होना, जजससे ऊष्मा बाहर नहीं कनकल पाती। 3. लगभग 92 गुना अमधक सतही वायुदाब। 4. सल््यूररक अम्ल क े घने बादल, जो ऊजाय क े संतुलन को प्र भाकवत करते हैं। 5. अरबों वर्ों तक ग्र ीनहाउस प्र भाव का लगातार बढ़ना। 5.3 उच्च तापमान क े प्र भाव शुक्र की सतह पर औसत तापमान लगभग 465 ° C रहता है, जो सीसा ( Lead ) जैसी धातु को कपघलाने के ललए पयायप्त है। टदन और रात क े तापमान में बहुत कम अंतर होता है क् योंकक घना वायुमंडल ऊष्मा को पूरे ग्र ह पर समान रू प से कवतररत कर देता है। इतने अमधक तापमान क े कारण — - सतह पर तरल जल का अल्स्तत्व संभव नहीं है। - अमधकांश ज्ञ ात जीवों का जीकवत रहना असंभव है। - अंतररक्ष यानों क े ललए लंबे समय तक कायय करना अत्यंत कटठन होता है। 5.4 पृथ्वी क े ललए सीख शुक्र का अध्ययन वैज्ञाकनकों को यह समझने में सहायता करता है कक यटद ककसी ग्र ह के वायुमंडल में ग्र ीनहाउस गैसों की मात्रा अत्यमधक बढ़ जाए, तो जलवायु में ककतने बड़े पररवतयन हो सकते हैं। इसललए शुक्र को पृथ्वी के संभाकवत जलवायु भकवष्य को समझने की दृ मि से भी मह त् वपूणय माना जाता है। 5.5 कनष्कर्य ग्रीनहाउस प्र भाव ही शुक्र ग्र ह की सबसे महत्वपूणय कवशेर्ता है। इसी प्र कक्रया ने इसे सौर मंडल का सबसे गमय ग्र ह बना टदया है। इसललए शुक्र ग्र ह का अध्ययन ग्र हों की जलवायु, वायुमंडलीय कवकास तथा ग्र ीनहाउस प्र भाव को समझने क े ललए अत्यंत महत्वपूणय है। अध्याय 6 शुक्र ग्र ह की जलवायु एवं मौसम शुक्र ग्र ह की जलवायु ( Climate ) सौर मंडल में सबसे अमधक चरम ( Extreme ) मानी जाती है। यहााँ अत्यमधक तापमान, बहुत अमधक वायुदाब, घने काबयन डाइऑक्साइड के वायुमंडल तथा सल््यूररक अम्ल के बादलों के कारण पृथ्वी जैसी मौसमीय पररस्थस्थकतयााँ नहीं बनतीं। शुक्र की जलवायु अरबों वर्ों से लगभग स्थ स्थ र बनी हु ई है और पूरे ग्र ह पर अत्यमधक गमय वाता वरण कवद्यमान है। 6.1 जलवायु की प्र मुख कवशेर्ताएाँ शुक्र का औसत सतही तापमान लगभग 465 ° C है। यह तापमान टदन और रात दोनों समय लगभग समान रहता है। इसका कारण घना वायुमंडल है, जो ऊष्मा को पूरे ग्र ह पर समान रू प से कवतररत कर देता है। सतह पर वायुदाब लगभग 92 बार (पृथ्वी क े समुद्र तल के वायुदाब का लगभग 92 गुना) है। इतनी अमधक दाब की तुलना पृथ्वी क े महासागरों में लगभग 900 मीटर की गहराई पर पाए जाने वाले दाब से की जा सकती है। 6.2 शुक्र का मौसम शुक्र पर पृथ्वी की तरह वर्ाय, कहमपात, आाँधी या सामान्य बादलों वाला मौसम नहीं पाया जाता। इसके बादल मुख्य रू प से सल््यूररक अम्ल ( H₂SO₄ ) की सूक्ष्म बूंदों से बने हैं। ऊपरी वायुमंडल में लगभग 300 से 360 ककलोमीटर प्र कत घंटे की गकत से तेज हवाएाँ चलती हैं। इस घटना को सुपर - रोटेशन ( Super - rotation ) कहा जाता है, क् योंकक वायुमंडल ग्र ह के घूणयन की तुलना में कहीं अमधक तेज गकत से घूमता है। इसक े कवपरीत, सतह क े कनकट हवाओं की गकत सामान्यतः बहुत धीमी होती है। 6.3 वर्ाय होती है या नहीं? शुक्र क े बादलों में सल््यूररक अम्ल की बूंदें बनती हैं, लेककन वे सतह तक नहीं पहुाँचतीं। ऊ ाँ चे तापमान के कारण ये बूंदें बीच क े वायुमंडल में ही वाष्ष्पत हो जाती हैं। इसललए शुक्र की सतह पर ककसी भी प्र कार की वर्ाय नहीं होती। 6.4 मौसम और जलवायु में अंतर - मौसम ( Weather ) ककसी स्थ ान क े वायुमंडल की अल्पकाललक स्थ स्थ कत को दशायता है। - जलवायु ( Climate ) ककसी ग्र ह या क्ष े त्र क े मौसम का दीघयकाललक औसत स् वरूप होती है। शुक्र पर मौसम में क ु छ पररवतयन ऊपरी वायुमंडल में देखे जाते हैं, लेककन सतह की जलवायु लगभग हमेशा अत्यमधक गमय और स्थ स्थ र रहती है। 6.5 वैज्ञाकनक महत्व शुक्र की जलवायु का अध्ययन वैज्ञाकनकों को ग्र ीनहाउस प्र भाव, ग्र हों के वायुमंडलीय कवकास तथा पृथ्वी की जलवायु में होने वाले दीघयकाललक पररवतयनों को समझने में सहायता करता है। भकवष्य के कई अंतररक्ष ममशनों का उद्देश्य शुक्र क े बादलों, हवाओं और जलवायु प्र णाली का कवस्तृत अध्ययन करना है। कनष्कर्य शुक्र ग्र ह की जलवायु अत्यमधक गमय, शुष्क और उच्च वायुदाब वाली है। इसके मौसम की सबसे प्र मुख कवशेर्ताएाँ सल््यूररक अम्ल क े बादल, ऊपरी वायुमंडल की तीव्र हवाएाँ तथा सतह पर लगभग स्थ स्थ र तापमान हैं। यही कारण है कक शुक्र को सौर मंडल क े सबसे कवर्म जलवायु वाले ग्र हों में कगना जाता है। अध्याय 7 पवयत, पठार, मैदान, घाटटयााँ एवं अन्य स्थ लाकृकतक कवशेर्ताएाँ शुक्र ग्र ह की सतह मुख्यतः ज् वालामुखीय प्र कक्रयाओं से कनर्मिंत मानी जाती है। इसकी स्थ लाकृकत ( Topography ) में कवशाल पवयत, कवस्तृत मैदान, ऊ ाँ चे पठार, घाटटयााँ, ज् वालामुखी तथा कवत्तभन्न प्र कार की कववतयकनक ( Tectonic ) संरचनाएाँ पाई जाती हैं। इनका अमधकांश ज्ञ ान रडार मानलचत्रण, कवशेर्कर नासा के मैगलन ( Magellan ) ममशन से प्र ाप्त हु आ है। 7.1 पवयत ( Mountains ) शुक्र पर अनेक ऊ ाँ ची पवयत श्र े त्त णयााँ पाई जाती हैं। इनमें सबसे ऊ ाँ चा पवयत मैक्सवेल मॉन्टेस ( Maxwell Montes ) है, जजसकी ऊ ाँ चाई लगभग 11 ककलोमीटर मानी जाती है। यह पवयत इश्तर टेरा ( Ishtar Terra ) क्ष े त्र में स्थ स्थ त है। इसक े अकतररक्त र े या मॉन्टेस ( Freyja Montes ) तथा अकना मॉन्टेस ( Akna Montes ) जैसी पवयत श्र े त्त णयााँ भी महत्वपूणय हैं। 7.2 पठार ( Plateaus / Terrae ) शुक्र पर पृथ्वी क े महाद्वीपों जैसे दो कवशाल ऊ ाँ चे भूभाग पाए जाते हैं — - इश्तर टेरा ( Ishtar Terra ) – उिरी गोलाधय में स्थ स्थ त, अपेक्षाकृत छोटा लेककन अत्यमधक ऊ ाँ चा क्ष े त्र । - अरोडाइट टेरा ( Aphrodite Terra ) – भूमध्यरेखीय क्ष े त्र में स्थ स्थ त शुक्र का सबसे बड़ा ऊ ाँ चा भूभाग, जजसकी लंबाई लगभग 10,000 ककलोमीटर है। इन क्ष े त्र ों को शुक्र क े “महाद्वीप” जैसी संरचनाओं क े रू प में देखा जाता है। 7.3 मैदान ( Plains ) शुक्र की लगभग 80% सतह कवशाल ज् वालामुखीय मैदानों से ढकी हु ई है। ये मैदान प्र ाचीन लावा प्र वाहों से बने हैं और अपेक्षाक ृ त समतल हैं। प्र मुख मैदानों में अटलांटा प् लैकनटटया ( Atalanta Planitia ) तथा गुइनेवीर प् लैकनटटया ( Guinevere Planitia ) शाममल हैं। 7.4 घाटटयााँ ( Valleys ) शुक्र पर कई लंबी और चौड़ी घाटटयााँ पाई जाती हैं। इनमें सबसे प्र लसद्ध बाष्ल्टस वैललस ( Baltis Vallis ) है, जजसे सौर मंडल की सबसे लंबी लावा - कनर्मिंत घाटटयों में से एक माना जाता है। इसकी लंबाई लगभग 6,800 ककलोमीटर है। 7.5 अन्य स्थ लाक ृ कतक कवशेर्ताएाँ शुक्र की सतह पर कई कवलशि भू - आक ृ कतयााँ भी पाई जाती हैं — - ज् वालामुखी ( Volcanoes ): शुक्र पर हजारों ज् वालामुखी हैं, जजनमें कुछ आज भी सकक्रय हो सकते हैं। - कोरोना ( Coronae ): वृिाकार या अंडाकार संरचनाएाँ, जो मैंटल से उठती गमय सामग्री के कारण बनी मानी जाती हैं। - टेसेरा ( Tesserae ): अत्यमधक कवक ृ त और जटटल चट्टानी क्ष े त्र , जजन्हें शुक्र की सबसे प्र ाचीन सतहों में कगना जाता है। - प्र भाव गतय ( Impact Craters ): उल्कापपिंडों के टकराने से बने अनेक क्रे टर भी पाए जाते हैं, यद्यकप उनकी संख्या पृथ्वी और बुध की तुलना में कम है। 7.6 स्थ लाक ृ कत का महत्व शुक्र की स्थ लाक ृ कत से यह संक े त ममलता है कक अतीत में इस ग्र ह पर व्य ापक ज् वालामुखीय गकतकवमधयााँ और आंतररक भूगभीय प्र कक्रयाएाँ हु ई थीं। इन संरचनाओं का अध्ययन ग्र ह के कवकास, आंतररक संरचना तथा भूवैज्ञाकनक इकतहास को समझने में महत्वपूणय भूममका कनभाता है। कनष्कर्य शुक्र की सतह पवयतों, कवशाल पठारों, कवस्तृत मैदानों, लंबी घाटटयों, ज् वालामुखखयों तथा कवलशि भू - आक ृ कतयों से समृद्ध है। यद्यकप इसकी सतह अत्यमधक गमय और कठोर है, कर्र भी इसकी स्थ लाकृकत सौर मंडल के अन्य स्थ लीय ग्र हों की तुलना में अत्यंत रोचक और वैज्ञाकनक दृ मि से महत्वपूणय मानी जाती है। अध्याय 8 शुक्र ग्र ह क े ज् वालामुखी एवं लावा मैदान शुक्र ग्र ह को सौर मंडल क े सबसे अमधक ज् वालामुखीय सकक्रय ग्र हों में से एक माना जाता है। वैज्ञाकनकों का अनुमान है कक इसकी सतह पर 85,000 से अमधक ज् वालामुखी तथा ज् वालामुखीय संरचनाएाँ मौजूद हैं। इनमें छोटे ज् वालामुखीय शंक ु ओं से लेकर कवशाल ढालाकार ( Shield ) ज् वालामुखी तक शाममल हैं। शुक्र की लगभग 80% सतह ज् वालामुखीय लावा से बने कवशाल मैदानों से ढकी हु ई है। 8.1 ज् वालामुखखयों का कनमायण वैज्ञाकनकों क े अनुसार शुक्र क े आंतररक भाग में उपस्थस्थत अत्यमधक ऊष्मा के कारण मैग्मा ऊपर उठता है। जब यह मैग्मा सतह पर पहुाँचता है तो उसे लावा कहा जाता है। यही लावा समय - समय पर र्ै लकर ज् वालामुखखयों तथा कवशाल लावा मैदानों का कनमायण करता है। 8.2 ज् वालामुखखयों क े प्र कार शुक्र पर मुख्यतः शील्ड ज् वालामुखी ( Shield Volcanoes ) पाए जाते हैं। इनका कनमायण अत्यमधक तरल बेसाष्ल्टक लावा क े बार - बार बहने से हु आ है। इसक े अकतररक्त छोटे ज् वालामुखीय गुंबद ( Volcanic Domes ), शंकु ( Cones ) तथा दरारों से कनकले लावा प्र वाह ( Fissure Eruptions ) के प्र माण भी ममले हैं। 8.3 प्र मुख ज् वालामुखी शुक्र क े प्र मुख ज् वालामुखखयों में मात मॉन्स ( Maat Mons ), सैर् मॉन्स ( Sif Mons ), गुला मॉन्स ( Gula Mons ) और थीया मॉन्स ( Theia Mons ) प्र मुख हैं। इनमें मात मॉन्स को संभाकवत रू प से सकक्रय ज् वालामुखी माना जाता है। हाल क े अंतररक्ष अध्ययनों से इसक े आसपास अपेक्षाकृत नई ज् वालामुखीय गकतकवमधयों के संकेत प्र ाप्त हु ए हैं। 8.4 लावा मैदान शुक्र की लगभग 80% सतह कवशाल बेसाष्ल्टक लावा मैदानों से बनी है। ये मैदान करोड़ों वर्ों तक बार - बार हु ए ज् वालामुखीय कवस्फोटों से कनकले लावा क े र् ै लाव से बने हैं। प्र मुख लावा मैदानों में अटलांटा प् लैकनटटया ( Atalanta Planitia ) तथा गुइनेवीर प् लैकनटटया ( Guinevere Planitia ) उल्लेखनीय हैं। 8.5 अन्य ज् वालामुखीय स्थ लाक ृ कतयााँ शुक्र पर अनेक कवलशि ज् वालामुखीय भू - आक ृ कतयााँ भी पाई जाती हैं, जैसे — - कोरोना ( Coronae ) - नोवा ( Novae ) - अरैक्नॉयड ( Arachnoids ) - लावा नहरें ( Lava Channels ) - ज् वालामुखीय गुंबद ( Volcanic Domes ) ये संरचनाएाँ शुक्र क े आंतररक भूगभीय कवकास को समझने में महत्वपूणय भूममका कनभाती हैं। 8.6 वैज्ञाकनक महत्व ज् वालामुखखयों का अध्ययन यह जानने में सहायता करता है कक शुक्र आज भी भूगभीय दृ मि से ककतना सकक्रय है। यटद वतयमान में भी ज् वालामुखीय गकतकवमध जारी है, तो इससे ग्र ह की आंतररक ऊष्मा, मैंटल की संरचना तथा ग्र ह क े कवकासक्रम को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। कनष्कर्य ज् वालामुखी और लावा मैदान शुक्र ग्र ह की सबसे प्र मुख भू - आकृकतक कवशेर्ताएाँ हैं। इन्होंने पूरे ग्र ह की सतह को आकार टदया है और आज भी शुक्र क े भूवैज्ञाकनक इकतहास तथा संभाकवत वतयमान गकतकवमधयों को समझने की क ु ं जी माने जाते हैं। अध्याय 9 शुक्र ग्र ह की कववतयकनकी एवं भूवैज्ञाकनक कवकास शुक्र ग्र ह की कववतयकनकी ( Tectonics ) और भूवैज्ञाकनक कवकास ( Geological Evolution ) ग्र ह कवज्ञान के सबसे महत्वपूणय शोध कवर्यों में से हैं। आकार और आंतररक संरचना में पृथ्वी से समान होने के बावजूद शुक्र पर पृथ्वी जैसी सकक्रय प् लेट कववतयकनकी ( Plate Tectonics ) के स्प ि प्र माण नहीं ममले हैं। इसके स्थ ान पर वहााँ एक त्त भन्न प्र कार की कववतयकनक प्र णाली कायय करती है, जजसने ग्र ह की सतह को वतयमान स् वरूप प्र दान ककया है। 9.1 कववतयकनकी ( Tectonics ) कववतयकनकी वह प्र कक्रया है जजसक े अंतगयत ककसी ग्र ह की भूपपयटी पर तनाव, संपीड़न तथा आंतररक बलों के कारण दरारें, पवयत, भ्र ं श और अन्य भू - आक ृ कतयााँ बनती हैं। वैज्ञाकनकों का मानना है कक शुक्र पर पृथ्वी की तरह अनेक गकतशील कववतयकनक प् लेटें नहीं हैं। इसकी बाहरी चट्टानी परत ( Lithosphere ) एक कवशाल, लगभग अखंड आवरण के रू प में व्य वहार करती है। इसके नीचे स्थ स्थ त मैंटल की ऊष्मा और संवहन ( Convection ) क े कारण सतह पर कवत्तभन्न प्र कार की कववतयकनक संरचनाएाँ बनती हैं। 9.2 प्र मुख कववतयकनक संरचनाएाँ शुक्र की सतह पर कनम्नललखखत प्र मुख कववतयकनक संरचनाएाँ पाई जाती हैं — - कोरोना ( Coronae ) – वृिाकार संरचनाएाँ, जो मैंटल से ऊपर उठती गमय सामग्री के कारण बनी मानी जाती हैं। - टेसेरा ( Tesserae ) – अत्यमधक कवक ृ त एवं जटटल चट्टानी क्ष े त्र , जजन्हें शुक्र की सबसे प्र ाचीन सतह माना जाता है। - रर्ट घाटटयााँ ( Rift Valleys ) – भूपपयटी क े खखिंचाव से बनी लंबी दरारनुमा घाटटयााँ। - भ्र ं श ( Faults ) तथा वलन ( Folds ) – आंतररक तनाव और संपीड़न से कनर्मिंत संरचनाएाँ। 9.3 भूवैज्ञाकनक कवकास वैज्ञाकनकों क े अनुसार शुक्र का कनमायण लगभग 4.56 अरब वर्य पूवय हु आ। प्र ारंत्तभक काल में इसकी सतह अत्यमधक गमय थी और ग्र ह क े भीतर व्य ापक ज् वालामुखीय गकतकवमधयााँ होती थीं। लगभग 30 से 70 करोड़ वर्य पूवय शुक्र पर बड़े पैमाने पर ज् वालामुखीय पुनसयतहीकरण ( Global Resurfacing ) हु आ होगा। इस घटना में कवशाल मात्रा में लावा बहा और ग्र ह की पुरानी सतह का अमधकांश भाग नई ज् वालामुखीय चट्टानों से ढक गया। यही कारण है कक शुक्र की सतह पर प्र भाव गतय ( Impact Craters ) अपेक्षाकृत कम टदखाई देते हैं। हाल क े अंतररक्ष ममशनों और अध्ययनों से यह संक े त भी ममले हैं कक शुक्र पर आज भी कुछ ज् वालामुखीय गकतकवमधयााँ जारी हो सकती हैं, जजससे यह ग्र ह पूणयतः कनष्ष्क्रय नहीं माना जाता। 9.4 पृथ्वी से तुलना पृथ्वी पर प् लेट कववतयकनकी महाद्वीपों की गकत, भूक ं पों और पवयत कनमायण का मुख्य कारण है। इसके कवपरीत शुक्र पर अभी तक सकक्रय प् लेट कववतयकनकी क े प्र माण नहीं ममले हैं। कर्र भी दोनों ग्र हों की आंतररक ऊष्मा और ज् वालामुखीय प्र कक्रयाओं में क ु छ समानताएाँ अवश्य हैं। 9.5 वैज्ञाकनक महत्व शुक्र की कववतयकनकी का अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कक पृथ्वी जैसे आकार वाले ग्र ह अलग - अलग पररस्थस्थकतयों में ककस प्र कार कवकलसत होते हैं। इससे ग्र हों की आंतररक संरचना, ज् वालामुखीय गकतकवमधयों तथा सौर मंडल क े कवकास क े बारे में महत्वपूणय जानकारी प्र ाप्त हो ती है। कनष्कर्य शुक्र की कववतयकनकी पृथ्वी से त्त भन्न है, परंतु अत्यंत सकक्रय भूवैज्ञाकनक इकतहास का संकेत देती है। कोरोना, टेसेरा, रर्ट घाटटयााँ तथा व्य ापक ज् वालामुखीय पुनसयतहीकरण इस ग्र ह के कवकास की प्र मुख कवशेर्ताएाँ हैं। इनका अध्ययन ग्र ह कवज्ञान की दृ मि से अत्यंत महत्वपू णय है। अध्याय 10 प्र भाव गतय ( Impact Craters ) एवं उनकी कवशेर्ताएाँ प्र भाव गतय ( Impact Craters ) वे गोलाकार गड्ढे हैं, जो ककसी ग्र ह की सतह पर उल्कापपिंड ( Meteoroid ), क्ष ु द्र ग्र ह ( Asteroid ) अथवा धूमक े तु ( Comet ) क े तीव्र वेग से टकराने पर बनते हैं। शुक्र ग्र ह पर भी अनेक प्र भाव गतय पाए जाते हैं, पकिंतु उनकी संख्या बुध, चंद्रमा तथा मंगल की तुलना में कार्ी कम है। 10.1 प्र भाव गतों का कनमायण जब कोई उल्कापपिंड अत्यमधक वेग से शुक्र की सतह से टकराता है, तो उसकी गकतज ऊजाय कवस्फोटक ऊजाय में बदल जाती है। इससे सतह पर एक गोलाकार गड्ढा बनता है, जजसके चारों ओर चट्टानों और धूल का मलबा र्ै ल जाता है। बड़े प्र भावों से क ें द्र ीय लशखर ( Central Peak ) और बहुवलयी ( Multi - ring ) संरचनाएाँ भी बन सकती हैं। 10.2 शुक्र पर प्र भाव गतों की संख्या अब तक शुक्र की सतह पर लगभग 1,000 क े आसपास प्र भाव गतों की पहचान की जा चुकी है। इनका कवतरण पूरे ग्र ह पर लगभग समान रू प से है। इससे संक े त ममलता है कक ग्र ह की अमधकांश सतह लगभग एक ही भूवैज्ञाकनक काल में बनी या पुनर्निंर्मिंत हु ई। 10.3 प्र भाव गतों की कवशेर्ताएाँ शुक्र क े प्र भाव गतों की प्र मुख कवशेर्ताएाँ कनम्नललखखत हैं — - अमधकांश गतय लगभग 3 ककलोमीटर से बड़े हैं। - छोटे उल्कापपिंड घने वायुमंडल में ही जल जाते या टूट जाते हैं, इसललए बहुत छोटे क्रे टर बहुत कम ममलते हैं। - बड़े गतों क े चारों ओर कनक्षेप ( Ejecta ) और बहाव जैसी संरचनाएाँ टदखाई देती हैं। - कई बड़े प्र भाव गतों में क ें द्र ीय लशखर ( Central Peak ) कवकलसत हो जाता है। - प्र भाव गतों का कवतरण पूरे ग्र ह पर लगभग समान है। 10.4 घने वायुमंडल का प्र भाव शुक्र का घना वायुमंडल छोटे उल्कापपिंडों को सतह तक पहुाँचने से पहले ही नि कर देता है। यही कारण है कक यहााँ छोटे प्र भाव गतय बहुत कम पाए जाते हैं। क े वल बड़े और अमधक मजबूत उल्कापपिंड ही सतह तक पहुाँचकर प्र भाव गतय बना पाते हैं। 10.5 वैज्ञाकनक महत्व प्र भाव गतों का अध्ययन ग्र ह की सतह की आयु, भूवैज्ञाकनक इकतहास तथा ज् वालामुखीय पुनसयतहीकरण ( Resurfacing ) की घटनाओं को समझने में महत्वपूणय भूममका कनभाता है। शुक्र पर अपेक्षाकृत कम प्र भाव गतय यह संक े त देते हैं कक अतीत में इसकी सतह व्य ापक रू प से नई ज् वालामुखीय चट्टानों से ढक गई थी। कनष्कर्य प्र भाव गतय शुक्र ग्र ह क े भूवैज्ञाकनक इकतहास क े महत्वपूणय साक्ष्य हैं। यद्यकप इनकी संख्या अन्य स्थ लीय ग्र हों की तुलना में कम है, कर्र भी ये ग्र ह की सतह की आयु, वायुमंडल के प्र भाव तथा भूवैज्ञाकनक कवकास को समझने में अत्यंत उपयोगी लसद्ध होते हैं।