यह शोधपरक अध्ययन सम्राट शाहजहाँ, दशरथ मांझी और एकनाथजी रानाडे के जीवन में पत्थरों की भूमिका, उनके संघर्ष, प्रेरणा और उपलब्धियों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार इन तीनों महान व्यक्तित्वों ने पत्थरों को प्रेम, लोक-कल्याण, राष्ट्र-निर्माण और मानवीय संकल्प के प्रतीक के रूप में परिवर्तित किया। यह शोध इतिहास, समाज, संस्कृति और मानव मूल्यों के विभिन्न आयामों को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।